बिहार में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत आज (16 फरवरी 2026) 25 लाख महिलाओं के बैंक खातों में 10-10 हजार रुपये की राशि ट्रांसफर की गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कुल 2,500 करोड़ रुपये की यह धनराशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से लाभार्थियों तक पहुंचाई। यह योजना महिलाओं को स्वरोजगार और छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करने का उद्देश्य रखती है। पहले चरण में भी लाखों महिलाओं को लाभ मिल चुका है, और अच्छा प्रदर्शन करने वाली लाभार्थियों को बाद में अतिरिक्त सहायता (कुछ मामलों में 2 लाख तक) मिल सकती है।
दरअसल, इस फैसले पर बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। सदाकत आश्रम में प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि सरकार का “वोट चोरी करने का फार्मूला” सफल रहा है, और अब सत्ताधारी दल को पैसे देकर वोट लेने का चस्का लग गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी चीजों का नशा लग जाए तो लोग बार-बार ऐसा करते हैं। राजेश राम ने आगे कहा कि “2 लाख से क्या होता है? इससे बेहतर है कि स्थायी रोजगार उपलब्ध कराया जाए।” बिहार में रोजगार के अवसरों की कमी बताते हुए उन्होंने उल्लेख किया कि भुखमरी के कारण लोग आत्महत्या कर रहे हैं।
लोजपा (रामविलास) की ओर से दलितों के अपमान की बात पर उन्होंने जवाब दिया कि बोलने और करने में फर्क है। पूरे बिहार में दलितों पर अत्याचार बढ़े हैं, कई घटनाएं सामने आ रही हैं। महिलाओं के साथ बलात्कार के मामले भी बढ़ गए हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जो बोलेगा, वह जेल जाएगा, और इस पर भी सरकार की प्रतिक्रिया आनी चाहिए। महिलाओं की स्थिति बदतर है, वे डर के मारे घर में कैद हैं, और उनके बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। इसके साथ ही, आज कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में संगठन सृजन अभियान को लेकर बैठक हुई, जिसमें बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरू भी शामिल हुए। कांग्रेस ने बिहार में 40 ऑब्जर्वर नियुक्त किए हैं। राजेश राम ने बताया कि यह अभियान बहुत रिसर्च के बाद शुरू किया गया है। यह जिला स्तर से शुरू होकर प्रखंड और फिर पंचायत स्तर तक जाएगा।
ऑब्जर्वर 7 दिनों तक क्षेत्र का अध्ययन करेंगे, जिसमें चार मुख्य बिंदुओं पर फोकस है:
-संगठन सृजन में हमारी कमजोरियां क्या हैं।
-काम करने की क्षमता वाले लोगों की पहचान।
-सामाजिक समीकरण को कैसे संतुलित किया जाए।
-सबको समान अवसर मिले।