क्या लालू यादव को नीतीश कुमार ने बनाया था सीएम, जानिये सच्चाई…

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सिटी पोस्ट लाइव :बिहार की राजनीति में बहस छिड़ी है-क्या नीतीश कुमार ने लालू यादव को पहलीबार मुख्यमंत्री बनवाया?लालू यादव और नीतीश कुमार जेपी आंदोलन की उपज हैं. दोनों छात्र राजनीति से चुनावी राजनीति में आए और बिहार की राजनीति पिछले साढ़े तीन दशक से इन दोनों के ही इर्द-गिर्द घूम रही है. नीतीश और लालू सत्ता के लिए साथ भी आते रहे तो सत्ता के लिए ही अलग भी होते रहे.बिहार में कांग्रेस की राजनीति को चुनौती जेपी आंदोलन से ही मिली थी और इसी आंदोलन ने लालू और नीतीश को बड़ा नेता भी बनाया.

1989 में बिहार के भागलुपर में दंगों के बाद बिहार से कांग्रेस की सत्ता का अंत हुआ और 1990 में लालू यादव जनता दल से बिहार के मुख्यमंत्री बने.लालू यादव के मुख्यमंत्री बनने की कहानी काफी दिलचस्प है. तत्कालीन प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह, राम सुंदर दास को मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे. उप-प्रधानमंत्री देवीलाल लालू यादव के पक्ष में थे. नीतीश कुमार भी लालू यादव के पक्ष में ही थे. लेकिन जनता दल के शीर्ष नेतृत्व के ख़िलाफ़ विधायक कैसे जा सकते थे? चंद्रशेखर और विश्वनाथ प्रताप सिंह की बनती नहीं थी. ऐसे में नीतीश कुमार ने चाल चली. नीतीश कुमार ने कहा कि वीपी सिंह को रोकिए नहीं तो यहाँ अपने मन का सीएम बना देंगे. चंद्रशेखर को भी अपना दबदबा दिखाने का मौक़ा मिल गया. चंद्रशेखर ने रघुनाथ झा को आगे कर दिया.

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ऐसे में मुख्यमंत्री के तीन दावेदार हो गए. लालू यादव, राम सुंदर दास और तीसरे रघुनाथ झा. विधायकों ने वोटिंग के ज़रिए नेता चुना और सात विधायकों ने रघुनाथ झा के पक्ष में वोट कर दिया. ऐसे में लालू यादव तीन वोट से जीत गए और वीपी सिंह का दांव नाकाम रहा.इस तरह से नीतीश कुमार ने  लालू यादव को पहली बार मुख्यमंत्री बनाने में अहम भूमिका निभाई थी.नीतीश कुमार 1990 में  लालू यादव की तरक़्क़ी में ही अपनी तरक़्क़ी देखते थे. पुराने समाजवादी नेता लालू और नीतीश को जगह देने के लिए तैयार नहीं थे. दूसरी बात यह भी कि नीतीश कुमार जिस कुर्मी जाति से हैं, उसकी तादाद बिहार में कम है जबकि यादव 18 फ़ीसदी हैं.””ऐसे में नीतीश अपनी सीमा समझते थे. नीतीश कुमार को लगता था कि उन्होंने लालू को सीएम बनाने में जिस तरह की मदद की, उसके बाद लालू उनकी हर बात सुनेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और दोनों की राह अलग हो गई.

साल 1994 में नीतीश कुमार ने जॉर्ज फ़र्नान्डिस के साथ मिलकर समता पार्टी बनाई और 1995 के बिहार विधानसभा चुनाव में लालू यादव और नीतीश कुमार अलग हो गए.हालांकि 1995 चुनाव में नीतीश कुमार कुछ ख़ास नहीं कर पाए. समता पार्टी केवल सात सीटों तक ही सीमित रह गई और लालू यादव एक बार फिर राज्य के मुख्यमंत्री बने.1995 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद नीतीश कुमार को लगा कि वो बिहार में लालू यादव से अकेले नहीं लड़ सकते हैं. जिसके कारण, 1996 के लोकसभा चुनाव में नीतीश ने हिंदूवादी पार्टी बीजेपी से गठबंधन कर लिया.

साल 2000 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार और बीजेपी को 121 सीटों पर कामयाबी मिली. नीतीश कुमार बिना बहुमत के मुख्यमंत्री बने. हालांकि एक हफ़्ते के भीतर ही नीतीश को इस्तीफ़ा देना पड़ गया.इसके बाद कांग्रेस के समर्थन से फिर राबड़ी देवी मु्ख्यमंत्री बनीं. आख़िरकार 2005 में नीतीश कुमार को सफलता मिली और वह बिहार के मुख्यमंत्री बन गए.अक्तूबर 2005 में हुए इस विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 55 और जनता दल यूनाइटेड को 88 सीटों पर जीत मिली और पूर्ण बहुमत के साथ गठबंधन की सरकार बनी. इसके बाद से नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री हैं.

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