डिप्टी सीएम विजय सिन्हा के जमीन विवादों पर तल्ख तेवर, पटना के सभी सीओ और राजस्व कर्मियों की छुट्टियां रद्द

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार में भूमि संबंधी लंबित मामलों के निष्पादन में हो रही देरी और अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा के कड़े रुख के बाद पटना जिला प्रशासन बड़े एक्शन मोड में आ गया है। पटना के जिलाधिकारी (डीएम) डॉ. चंद्रशेखर सिंह (त्यागराजन एसएम) ने जिले के सभी भूमि सुधार उप समाहर्ता (DCLR), अंचलाधिकारी (CO) और राजस्व कर्मचारियों की छुट्टियां तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी हैं।

विजय सिन्हा की चेतावनी का असर
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का प्रभार संभालते ही डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने विभाग में भ्रष्टाचार और लापरवाही के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। हाल ही में मुजफ्फरपुर में आयोजित एक ‘जन संवाद’ कार्यक्रम के दौरान उन्होंने राजस्व अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि “अधिकारी अपनी कार्यप्रणाली सुधार लें, अन्यथा गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।”

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उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि आम जनता को जमीन से जुड़े कार्यों के लिए दफ्तरों के चक्कर कटवाना अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनकी इस सख्ती ने प्रशासनिक गलियारे में हड़कंप मचा दिया है।

31 दिसंबर तक मुख्यालय नहीं छोड़ेंगे अधिकारी
डिप्टी सीएम की सख्ती को देखते हुए पटना डीएम ने आधिकारिक आदेश जारी किया है। इसके तहत 23 दिसंबर 2025 से 31 दिसंबर 2025 तक किसी भी सीओ, डीसीएलआर या राजस्व कर्मचारी को छुट्टी नहीं मिलेगी। प्रशासन का लक्ष्य साल के अंत तक जमीन से जुड़े अधिक से अधिक लंबित मामलों का निपटारा करना है।

आदेश में कहा गया है कि यदि किसी अधिकारी की छुट्टी पहले से स्वीकृत थी, तो उसे भी तत्काल प्रभाव से अस्वीकृत कर दिया गया है। सभी संबंधित पदाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में उपस्थित रहकर विभागीय निर्देशों के अनुसार कार्यों का ससमय निष्पादन करने का निर्देश दिया गया है।

भ्रष्टाचार पर नकेल कसने की तैयारी
विजय सिन्हा लगातार जन संवाद के जरिए सीधे जनता से फीडबैक ले रहे हैं। उनका मानना है कि जमीन विवाद ही बिहार में अपराध की मुख्य जड़ हैं। ऐसे में म्यूटेशन (दाखिल-खारिज), सीमांकन और अन्य भूमि संबंधी कार्यों में देरी करने वाले बिचौलियों और अधिकारियों पर सरकार की पैनी नजर है। पटना डीएम के इस फैसले को इसी प्रशासनिक सफाई अभियान का हिस्सा माना जा रहा है।

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