Bihar Politics: नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर को कौन सा ‘झटका’ दिया जो जन सुराज बनाने की ठान ली?
सिटी पोस्ट लाइव : नीतीश कुमार पर लगातार हमलावर रहनेवाले जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर पर जेडीयू ने बड़ा पलटवार किया है। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के विधान परिषद सदस्य संजय सिंह ने चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर पर गंभीर आरोप लगाए हैं.संजय सिंह ने दावा किया कि जब प्रशांत किशोर जेडीयू में शामिल हुए थे, तब उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उपमुख्यमंत्री पद की मांग की थी जिसे सीएम नीतीश कुमार ने ठुकरा दिया था. इसके बाद प्रशांत किशोर ने धीरे-धीरे पार्टी से दूरी बनाई और बाद में अपनी पार्टी जन सुराज बनाकर चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी की.
एमएलसी संजय सिंह ने सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि जब प्रशांत किशोर जेडीयू में आए थे तब उन्हें नीतीश कुमार ने बड़ा सम्मान देते हुए पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बना सम्मानित किया था. यही नहीं नीतीश कुमार, प्रशांत किशोर की इतनी इज्जत करते थे कि अपने आवास सात नंबर में प्रशांत किशोर को रहने की जगह दी थी. लेकिन, प्रशांत किशोर की नजर तो कहीं और थी और आख़िरकार उन्होंने एक दिन अपनी मंशा नीतीश जी से जाहिर कर दी. लेकिन, उनकी मंशा ऐसी थी जिसको पूरा नहीं किया जा सकता था.
संजय सिंह ने कहा कि प्रशांत किशोर ने अपनी महत्वाकांक्षा नीतीश जी के सामने रखते हुए कहा कि वो बिहार के डिप्टी सी एम बनना चाहते हैं. इसे नीतीश जी ने नामंजूर कर दिया जो प्रशांत किशोर के लिए किसी झटके से कम नहीं था. इसी घटना के बाद प्रशांत किशोर धीरे-धीरे जेडीयू से दूर होते चले गए और आज अपनी पार्टी बनाकर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। नीतीश कुमार जी बारे में अनाप-शनाप बोल रहे हैं. सेहत पर सवाल उठा रहे हैं. संजय सिंह आरोप लगाते हैं कि प्रशांत किशोर व्यापारी हैं जो अपने काले धन को सफेद करने के लिए चुनावी मैदान में पार्टी बनाकर उतरे हुए हैं
संजय सिंह के आरोप पर प्रशांत किशोर की पार्टी के प्रवक्ता मनोज बैठा कहते हैं कि जेडीयू हताशा में है और उन्हें भी पता है कि बिहार की जनता अब नीतीश कुमार को बर्दाश्त करने वाली नहीं है, क्योंकि जनता को प्रशांत किशोर के रूप में बदलाव करने वाला मिल गया है. रही बात जेडीयू से अलग होने की तो प्रशांत किशोर बिहार को बदलने और विकास के पथ पर आगे ले जाने की मंशा लेकर जेडीयू में शामिल हुए थे, लेकिन नीतीश कुमार को विकास से कोई मतलब नहीं था और इसके बाद प्रशांत किशोर का जेडीयू में रहने का कोई मतलब नहीं था. इसलिए, उन्होंने बिहार के हित में अलग होकर पार्टी बनाई और जनता के बीच में हैं.