सिटी पोस्ट लाइव:आरजेडी नेता तेजस्वी यादव को महागठबंधन में मुख्यमंत्री का चेहरा बताने से कांग्रेस क्यों आनाकानी कर रही है? राजनीतिक पंडितों के अनुसार इसके पीछे केवल सीट शेयरिंग नहीं बल्कि वोटों का गणित भी है. तेजस्वी यादव muslim yadav के नेता माने जाते हैं. कांग्रेस अपने पुराने वोटर्स सवर्ण और अनुसूचित जाति के मतदाताओं को वापस लाना चाहती है, जो अभी एनडीए के साथ खड़े हैं..तेजस्वी का नाम पहले ही आगे कर देने से सवर्णों के साथ कमजोर उप-जातियों, विशेषकर अति-पिछड़ा, के कांग्रेस से बिदकने का डर है. इसलिए चुनाव संपन्न होने तक कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व तेजस्वी के नाम को आगे करने के मूड में नहीं है.
लेकिन तेजस्वी यादव स्वयं को मुख्यमंत्री का चेहरा बताने लगे हैं.वोटर अधिकार यात्रा के दौरान आरा में उन्होंने अपने को मुख्यमंत्री का चेहरा बताया था, जिसका समर्थन समाजवादी पार्टी ने नेता अखिलेश यादव ने किया था.उत्तर प्रदेश में अखिलेश पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की राजनीति पर आगे बढ़ रहे, जिसको लेकर कांग्रेस सतर्क है. अल्पसंख्यकों के साथ अनुसूचित जाति के वोटों को लेकर कांग्रेस के लिए खींचतान की यही स्थिति बिहार में भी है. 1989 में हुए भागलपुर दंगे के बाद अंतर्द्वंद्व में उलझी कांग्रेस अब वह खोये हुए जनाधार के लिए व्याकुल है.
कांग्रेस के वोट बैंक को अपना बनाकर ही आरजेडी आज सबसे ताकतवर दल बना है. राहुल इसे बखूबी समझ रहे. उनकी रणनीति लोकसभा के अगले चुनाव को लेकर क्षेत्रीय संतुलन बनाने की है. ऐसे में वह महागठबंधन में किसी का दबदबा नहीं चाहते. मुख्यमंत्री पद को लेकर अनिश्चितता से उस दबदबे पर कुछ हद तक विराम लगता है, इसलिए कांग्रेस इस मुद्दे को चुनाव बाद के लिए टाल रही है.वोटर अधिकार यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री के चेहरे से संबंधित प्रश्न को राहुल गांधी टाल गए थे.लेकिन इस बात का भी ध्यान रखा कि कांग्रेस का रुख भी सार्वजनिक न हो और ना ही महागठबंधन में भ्रम की स्थिति बने. इसके बावजूद राजद संशय में है, क्योंकि सीटों का समझौता अभी हुआ नहीं है.
कांग्रेस को डर है कि तेजस्वी के नाम पर हामी भरते ही सीट बंटवारे में उसकी स्थिति कमजोर हो जाएगी. इसका असर चुनाव परिणाम पर भी पड़ सकता है. पिछले वर्षों में एनडीए के हो चुके अपने कोर वोटरों को वह शीर्ष नेतृत्व और साफ्ट हिंदुत्व के जरिये वापस लाने का प्रयास कर रही है. इसीलिए तेजस्वी का नाम लेने के बजाय कांग्रेस स्थिति को खुला रखना पसंद कर रही है.