सिटी पोस्ट लाइव : पहले तेजस्वी यादव पर अहंकारी होने का आरोप लगाने वाले पप्पू यादव अब तेजस्वी यादव को क्रांति का प्रतीक और बिहार की आखिरी उम्मीद बता रहे हैं. पप्पू यादव का अचानक लिया गया यू टर्न हर किसी को चौंका रहा है. आम लोग हैरान हैं क्योंकि पप्पू यादव और तेजस्वी यादव के बीच हाल में ही राजनीतिक तनाव देखा गया था. अब सवाल पूछे जा रहे हैं कि क्या यह सियासी समीकरणों का खेल है या पुरानी कड़वाहट का अंत, या फिर कुछ और रणनीति?
तेजस्वी यादव की तारीफ में इस कदर कसीदे पढ़ने लगे जिसकी किसी ने कल्पना तक नहीं की थी. पूर्णिया सांसद ने कहा, क्रांति के प्रतीक, नफरत और आतंक को मिटाने का नाम क्या है? आपकी उम्मीद आपका सपना और आपका विश्वास कौन है? इंसानियत का पैगाम कौन है? मोहब्बत का दूत कौन है? क्रांतिवीर और कर्मवीर कौन है? अरे मोदी जी हमारे जननायक तेजस्वी यादव जो लगातार बिहार के लिए संघर्ष करते रहे, बिहार की एक उम्मीद तेजस्वी जी आपके बीच हैं.
लोकसभा चुनाव के बाद से ही इन दोनों ही नेताओं के बीच काफी तनातनी रही है. तेजस्वी यादव ने संसदीय चुनाव में पप्पू यादव को हराने की अपील जनता से की थी. हालांकि, पप्पू यादव ने निर्दलीय चुनाव लड़ा था और जीत प्राप्त कर तेजस्वी यादव को करारा जवाब दिया था. इसके बाद हाल में बीते 9 जुलाई को पटना में महागठबंधन के प्रदर्शन के दौरान पप्पू यादव और कन्हैया कुमार को राहुल गांधी के मंच पर चढ़ने नहीं दिया गया था.तब राहुल गांधी और तेजस्वी यादव एक खुले ट्रक पर सवार होकर कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे. पप्पू यादव और कन्हैया कुमार ने भी ट्रक पर चढ़ने की कोशिश की, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोक दिया था.
पप्पू यादव ने कहा था , ‘इनका परिचय क्या है? वो लालू यादव का बेटा है, बस…अगर आज लालू यादव का नाम हटा दिया जाए, उनकी परछाई हटा दी जाए, तो कुत्ता पूछेगा…’ पप्पू यादव ने आगे कहा, ‘मुखिया चुनाव जीत जाएगा… अगर लालू यादव के बेटे का नाम हटा दिया जाए तो…’ इसके बाद पप्पू यादव ने कहा ता कि तेजस्वी यादव मुझे रोकने वाले कौन होते हैं. जब हम विधायक बने थे, तब तेजस्वी पैदा भी नहीं हुए थे. जाहिर है पप्पू यादव गहरे तक आहत दिख रहे थे और तेजस्वी यादव को लेकर तल्ख भी थे.
पप्पू यादव ने कहा था कि अगर तेजस्वी यादव सीएम बनते हैं तो या तो वह उन्हें मार देंगे या उन्हें बिहार छोड़ना पड़ेगा. हालांकि, बाद में उन्होंने सफाई दी और कहा कि उनकी बात को गलत तरीके से पेश किया गया. इसके पहले पप्पू यादव ने कहा था कि अगर लालू यादव का नाम हटा दिया जाए तो तेजस्वी यादव की राजनीतिक हैसियत कुछ नहीं रह जाएगी. लेकिन, अब लगता है कि उनके बीच की दूरी कम हो रही है. पूर्णिया में वोटर यात्रा के दौरान पप्पू यादव की पलटी पर हर कोई आश्चर्य में है क्योंकिपप्पू यादव ने राहुल गांधी के सामने तेजस्वी यादव के जननायक, क्रांति के प्रतीक, नफरत और आंतक को मिटाने का नाम और जनता की उ सपना और विश्वास तक बता दिया है.
2024 के लोकसभा चुनाव में पप्पू ने तेजस्वी पर हमला बोला था. उन्होंने कहा था कि उनके अहंकार ने राहुल गांधी को पीएम बनने से रोका. मगर हाल ही में राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा में दोनों एक मंच पर दिखे. पूर्णिया में राहुल गांधी की अगुवाई में वोटर अधिकार यात्रा ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी. पप्पू ने इस मंच पर तेजस्वी को बिहार की आवाज बताया और कहा, यह क्रांति का प्रतीक है. पप्पू यादव का यह बदला रुख बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को देखते हुए रणनीतिक लगता है. महागठबंधन को मजबूत करने और बीजेपी-जेडीयू गठबंधन को टक्कर देने के लिए पप्पू और तेजस्वी का एकजुट होना जरूरी था. पप्पू यादव का यह कदम उनके सियासी भविष्य को भी मजबूत करने की कोशिश हो सकता है, खासकर पूर्णिया में उनकी मजबूत पकड़ को देखते हुए.
राहुल गांधी के मंच पर दोनों की एकजुटता महागठबंधन को मजबूत करने की रणनीति हो सकती है. पप्पू यादव का तेजस्वी की तारीफ करना और महागठबंधन के मंच पर सक्रियता बिहार की राजनीति में नए समीकरण बना रही है. यह एकता क्या लंबे समय तक टिकेगी या फिर यह सिर्फ चुनावी रणनीति है, यह आने वाले महीनों में साफ होगा. फिलहाल, पप्पू का यह यू-टर्न बिहार की सियासत में चर्चा का केंद्र बना हुआ है.