तेज प्रताप यादव किसे बता रहे हैं RJD का ‘जयचंद’?’

Manisha Kumari

सिटी पोस्ट लाइव :. आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के परिवार में  आजकल ‘जयचंद’ की चर्चा हो रही है. परिवार और पार्टी से बेदखल किए गए उनके बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने एक बार फिर तेजस्वी यादव को अर्जुन और खुद को कृष्ण बताते हुए ‘जयचंद’ का जिक्र किया है. जब से तेज प्रताप यादव ने ‘जयचंद’ का जिक्र किया है तब से ही सियासी गलियारे में चर्चा हो रही है कि आखिर यह ‘जयचंद’ कौन है जिसके बारे में तेज प्रताप यादव बताना चाहते हैं.

परिवार और पार्टी से बेदखल किए गए तेज प्रताप यादव ने दोनों ही पोस्ट में ‘जयचंद’ का जिक्र किया है. दरअसल, जयचंद को भारतीय इतिहास में विवादास्पद व्यक्ति के रूप में जाना जाता जिसको विश्वासघात के प्रतीक के रूप में देखा जाता है. तेजप्रताप किसे जयचंद बता रहे हैं .2023 में जब तेज प्रताप यादव के एक बयान ने अपनी हत्या की साजिश का आरोप लगाते हुए हड़कंप मचा दिया था.  इसके पहले 2022 में 25 अप्रैल को उन्होंने आरजेडी द से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया था, तब भी उन्होंने इस जयचंद की तरफ  इशारा किया था.

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दरअसल, राजद में तेज प्रताप यादव की तेजस्वी यादव के बेहद करीबी कहे जाने वाले राज्यसभा सांसद संजय यादव से कभी नहीं बनी. अब जब बार-बार ‘जयचंद’ का जिक्र आ रहा है तो कड़ियों की लड़ियां जुड़ती जा रही हैं और इस बात से की चर्चा सियासी गलियारों में काफी जोर पर है कि तेज प्रताप यादव जिस ओर इशारा कर रहे हैं क्या वह संजय यादव ही हैं? बिहार की राजनीति को जानने समझने वाले सभी इस बात से वाकिफ हैं कि आरजेडी  में तेज प्रताप यादव और संजय यादव से एक तरह की अदावत चलती है.

हरियाणा के रहने वाले संजय यादव तेजस्वी यादव के मित्र और उनके राजनीतिक सलाहकार  हैं. अब वह राज्यसभा के सांसद भी हैं. तेज प्रताप यादव को वह नहीं सुहाते हैं. वर्ष 2022 और 2023 की दोनों की घटना में जब तेज प्रताप यादव ने जान से मारने की साजिश के आरोप लगा और पार्टी जब से इस्तीफा देने का जब उन्होंने ऐलान किया था, तब भी उन्होंने संजय यादव की ओर इशारा किया था.तेज प्रताप यादव अक्सर संजय यादव को प्रवासी सलाहकार कहते हैं. एक बार उन्होने साफ तौर पर कहा था कि प्रवासी सलाहकार सिर्फ लालू परिवार और राजद में मतभेद पैदा कर सकता है.

संजय यादव तेजस्वी यादव के स्कूल के दिनों के मित्र हैं. वर्ष 2015 चुनाव में पहली बार चुनाव की रणनीति बनाई थी.इसके बाद 2020 के चुनाव में आरजेडी के लिए तेजस्वी के साथ मिलकर पूरी रणनीति तैयार की थी. एनडीए के जंगलराज के नारे के नैरेटिव को खत्म करने के लिए 10 लाख नौकरी देने की रणनीति भी संजय यादव की बताई जाती है.

संजय यादव मुख्य रूप से तेजस्वी यादव के लिए ही काम करते हैं, लेकिन पार्टी के तमाम विधायकों पर भी उनकी पकड़ मानी जाती है. लालू प्रसाद यादव के सियासी रूप से असक्रिय होने के साथ ही तेजस्वी यादव के कमान संभालने के बाद संजय यादव का कद लगातार बढ़ता गया, लेकिन वह तेजप्रताप को कभी भाव देते नहीं दिखे हैं. संजय यादव पर तेजप्रताप के भड़कने के पीछे यह भी कारण माना जाता है कि तेजप्रताप के किसी भी बात या फैसले को संजय यादव न तो खुद ही तवज्जो देते हैं और न ही तेजस्वी को भी नोटिस करने देते हैं.

तेज प्रताप यादव तो पहले संजय यादव को सलाहकार पद से हटाने की मांग कर चुके हैं. दूसरी ओर संजय यादव यादव भी तेज प्रताप के किसी भी बात या फैसले को अधिक तवज्जो नहीं देते हैं.खास बात यह भी है कि संजय यादव की तेजस्वी यादव से इतनी नजदीकी है कि तेजस्वी के फैसलों में संजय यादव के सलाह और रणनीति की छाप स्पष्ट दिखती है.

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