Tej Patap Yadav:
सिटी पोस्ट लाइव : अपने प्रेम कहानी का सार्वजनिकरूप से इजहार कर तेजप्रताप यादव ने अपने परिवार को तो नुकशान पहुंचाया ही है साथ ही अपने राजनीतिक जीवन को दांव पर लगा दिया है.पार्टी से निष्काशन के बाद अब ये सवाल उठने लगा है कि क्या tejpratap यादव चुनाव लड़ेगें.तेजप्रताप ने पहले महुआ से चुनाव जीता और मंत्री बने लेकिन बाद में हसनपुर चले गए. अब उनका मन हसनपुर से भी उचट गया है और वह महुआ वापस आना चाहते थे पर ऐसा हो नहीं पाया.
पार्टी से निष्काशन के बाद अब आरजेडी के टिकट पर अब तेजप्रताप यादव के विधानसभा चुनाव लड़ने की संभावना नहीं है.ऐसे में आरजेडी के भीतर दो विधानसभा क्षेत्रों के दावेदारों की उम्मीदें बढ़ गई हैं. विधानसभा क्षेत्र महुआ और हसनपुर हैं, से अतीत और वर्तमान में तेजप्रताप का वास्ता है.तेजप्रताप यादव पहली बार 2015 में विधायक चुने गए थे.मंत्री भी बन गए. तब वे विधानसभा में महुआ का प्रतिनिधित्व कर रहे थे.जीत भी बड़े मतों के अंतर से मिली थी. तब महागठबंधन का कुछ और स्वरूप था.आरजेडी के साथ जेडीयू और कांग्रेस को मिलाकर महागठबंधन बना था और तेजप्रताप की जीत उसी समन्वय का प्रतिफल बताई गई थी.
बदले राजनीतिक समीकरण में तेजप्रताप को अपना विधानसभा क्षेत्र भी बदलना पड़ा और 2020 में वे महुआ छोड़कर हसनपुर चले गए. जीत वहां भी बड़ी रही, लेकिन उसका कारण एंटी-इन्कंबेंसी बताया गया.जेडीयू के प्रत्याशी राजकुमार राय थे, जो हसनपुर से दो बार विधायक चुने जा चुके थे. तब तेजप्रताप को 20 हजार से अधिक मतों के अंतर से जीत मिली थी, लेकिन पिछले दिनों की उनकी प्रतिक्रियाओं से पता चलता है कि हसनपुर से भी उनका मन उचट गया है. इस बार के चुनाव में वे महुआ वापस आना चाहते थे कि उससे पहले ही तुषारापात हो गया.