बिहार की राजनीति एक बड़े मोड़ पर खड़ी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि वे मुख्यमंत्री की कुर्सी कब छोड़ेंगे और दिल्ली की राजनीति में कब सक्रिय होंगे।
इस्तीफे और शपथ का संभावित शेड्यूल;
सूत्रों और राजनीतिक समीकरणों के अनुसार, नीतीश कुमार की विदाई और नई सरकार का गठन कुछ इस तरह हो सकता है। नीतीश कुमार वर्तमान में ‘समृद्धि यात्रा’ पर हैं। वे 30 मार्च तक अपना पांचवां चरण पूरा करेंगे। माना जा रहा है कि यात्रा पूरी करने के बाद ही वे पद से इस्तीफा देंगे। राज्यसभा में उनका कार्यकाल 9 अप्रैल से शुरू होगा। इससे पहले उन्हें बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देना होगा। हिंदू कैलेंडर के अनुसार 14 अप्रैल को खरमास समाप्त हो रहा है। शुभ कार्यों की शुरुआत के साथ ही बिहार में भाजपा के नेतृत्व वाली नई सरकार का शपथ ग्रहण हो सकता है।
सत्ता का नया समीकरण;
अगर भाजपा का मुख्यमंत्री बनता है, तो कैबिनेट का स्वरूप पूरी तरह उलट जाएगा। वर्तमान में जो विभाग जेडीयू के पास हैं, वे भाजपा को मिल सकते हैं और भाजपा वाले विभाग जेडीयू के पास जा सकते हैं। नई सरकार में कुल 32 मंत्री हो सकते हैं, इसमें BJP(13), JDU(15), LJP(R): 2 और HAM(1) और RLM (1) शामिल हो सकते हैं। चर्चा है कि जेडीयू नीतीश के बेटे निशांत कुमार के लिए सरकार में बड़ी भूमिका (सीएम या डिप्टी सीएम) की मांग कर रही है। वहीं, मुख्यमंत्री पद भाजपा के पास जाने की स्थिति में विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) का पद जेडीयू के खाते में जा सकता है।
मंत्रिमंडल के संभावित नए चेहरे;
| पार्टी | संभावित मंत्री | खासियत / आधार |
| JDU | उमेश कुशवाहा | प्रदेश अध्यक्ष, कुशवाहा समाज का बड़ा चेहरा। |
| JDU | शालिनी मिश्रा | भूमिहार समाज से, लगातार दूसरी बार विधायक। |
| JDU | महेश्वर हजारी | अनुभवी नेता, पूर्व मंत्री। |
| BJP | नीतीश मिश्रा | 5वीं बार विधायक, उच्च शिक्षित (MBA), मैथिल ब्राह्मण कोटा। |
| BJP | संजीव चौरसिया | पटना की दीघा सीट से बड़ी जीत, संगठन में मजबूत पकड़। |
| BJP | संजय मयूख | कायस्थ समाज से, भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के करीबी। |
| BJP | नीरज कुमार बबलू | राजपूत समाज का बड़ा चेहरा, लगातार 2005 से विधायक। |
क्या राज्यसभा सांसद रहते हुए कोई CM रह सकता है?
तकनीकी रूप से, मुख्यमंत्री बनने के लिए व्यक्ति को राज्य विधानमंडल (विधानसभा या विधान परिषद) का सदस्य होना अनिवार्य है। यदि कोई राज्यसभा सांसद मुख्यमंत्री बनता है, तो उसे 6 महीने के भीतर राज्य के किसी एक सदन की सदस्यता लेनी होगी। चूंकि नीतीश कुमार अब केंद्र की राजनीति की ओर रुख कर रहे हैं, इसलिए उनका इस्तीफा देना लगभग तय माना जा रहा है।