सिटी पोस्ट लाइव :अमित शाह ने बिहार चुनाव जितने का फ़ॉर्मूला बिहार बीजेपी को दे दिया है.एक कार्यकर्त्ता 20 वोट का फ़ॉर्मूला उन्होंने दिया है.‘अमित शाह ने सारे कार्यकर्ता एकजुट हो जाने और बूथ जितने का मन्त्र दे दिया है. उन्होंने कार्यकर्ताओं को हर गाँव और बूथ पर फोकस करने का निर्देश दिया है.अमित शाह 17 सितंबर को दो दिन के दौरे पर बिहार आए थे. इन दो दिनों में पटना, शाहाबाद और बेगूसराय गए. यहां सांसद, विधायक, MLC, मेयर, डिप्टी मेयर, पार्षद, जिलाध्यक्ष, मंडल अध्यक्ष और कार्यकर्ताओं से मिले. नजर चुनाव पर है. मगध और शाहाबाद NDA के लिए कमजोर कड़ी और RJD-लेफ्ट का मजबूत गढ़ है. शाहाबाद में विधानसभा की 22 और मगध में 51 सीटें हैं. यानी सवाल 73 सीटों का है. 2020 में महागठबंधन ने इनमें से 41 सीटें जीती थीं. NDA सिर्फ 22 सीट जीत पाया. तब चिराग पासवान ने JDU के खिलाफ कैंडिडेट उतार दिए थे. इस वजह से JDU के 11 कैंडिडेट हार गए. अमित शाह की कोशिश है कि दोबारा ऐसा न हो.
अमित शाह ने रोहतास के डेहरी ऑन सोन में कार्यकर्ताओं से बात की. शाहाबाद जीतने का रोडमैप बताया.‘अमित शाह जी ने सीनियर कार्यकर्ताओं को गांव-गांव जाने और एक कार्यकर्ता को 20 वोट दिलाने की जिम्मेवारी तय की है.उन्होंने कहा कि ये चुनाव सरकार बनाने का नहीं, बल्कि तीन तिहाई से ज्यादा बहुमत से सरकार बनाने का है. हमें यहां से तय करके जाना है कि 80% सीटें हमारे पास हो.अमित शाह ने कहा कि कार्यकर्ता ही पार्टी के मालिक हैं. हमारे यहां नेता थोपे नहीं जाते, नीचे से उठकर ऊपर आते हैं. मैंने करियर की शुरुआत बूथ अध्यक्ष से की थी.
2020 में NDA को शाहाबाद और मगध की 51 सीटों पर हार मिली थी. इनमें नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा की इस्लामपुर सीट भी शामिल है. हालांकि नालंदा में NDA की स्थिति बेहतर है. ये जिला मगध में आता है. 2014 के लोकसभा चुनाव में JDU को सिर्फ दो सीटें मिली थीं. इनमें एक नालंदा थी. यह जिला कुर्मी-कुशवाहा आबादी वाला है.यहां विधानसभा की 7 सीटें हैं। 2020 में NDA ने 7 सीट में से 6 सीटें जीती थीं. JDU के 43 में से 5 विधायक नालंदा से हैं. नालंदा को हटा दें, तो पूरे शाहाबाद और मगध में NDA के पास सिर्फ 16 सीटें हैं. BJP इसी कमजोर कड़ी को मजबूत करना चाहती है.
बिहार में हुई जाति गणना के मुताबिक, कुशवाहा कम्युनिटी की हिस्सेदारी कुल आबादी में करीब 4.21% है. 2020 में हुए विधानसभा और 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में NDA के पिछड़ने की सबसे बड़ी वजह कुशवाहा वोट बैंक का साथ न देना माना गया.2020 में कुशवाहा कम्युनिटी के बड़े नेता उपेंद्र कुशवाहा थर्ड फ्रंट से लड़ रहे थे. उनके कैंडिडेट्स को हर सीट पर 1500 से 15 हजार तक वोट मिले. इसका नुकसान NDA को हुआ. लोकसभा चुनाव में लालू यादव ने कुशवाहा कार्ड खेलकर NDA का खेल बिगाड़ दिया. लालू ने कुशवाहा कम्युनिटी से 8 उम्मीदवार चुनाव में उतार दिए. NDA ने इससे सबक लिया और इस बार विधानसभा चुनाव से पहले उपेंद्र कुशवाहा को राज्यसभा और JDU के भगवान सिंह कुशवाहा को MLC बनाया. इसे कुशवाहा वोटरों को साधने की कोशिश माना गया.
शाहाबाद में 2020 के चुनाव में JDU को हार मिली थी. चुनाव से पहले NDA में रहे चिराग पासवान ने JDU के खिलाफ कैंडिडेट उतार दिए थे. इस वजह से JDU के 11 कैंडिडेट चुनाव हार गए. हालांकि BSP से जीते जमा खान बाद में JDU में शामिल हो गए थे.इस बार अमित शाह और PM मोदी NDA को एकजुट दिखाने की कोशिश कर रहे हैं. कार्यकर्ताओं से कहा गया है कि वे NDA की सभी पार्टियों के नेता-कार्यकर्ताओं से मिलकर रहें.‘अमित शाह ने हर मंडल और बूथ लेवल पर कार्यक्रम चलाने का का और चुनाव से पहले कार्यकर्ताओं-नेताओं को घर-घर जाने का निर्कादेश दिया है.
शाहाबाद में लोकसभा की 4 सीटें आरा, सासाराम, बक्सर और काराकाट हैं. चारों पर महागठबंधन की जीत हुई. चुनाव नतीजे बताते हैं कि शाहाबाद का इलाका महागठबंधन का गढ़ बना हुआ है. इसकी बड़ी वजह महागठबंधन में शामिल भाकपा माले भी है, जिसकी इन इलाकों में अच्छी पकड़ है.2020 के चुनाव में शाहाबाद की 22 सीट में से महागठबंधन ने 14 सीटें जीती थीं. RJD को सबसे ज्यादा 10 सीटें मिलीं. कांग्रेस ने 4 सीटें जीतीं. BJP 4 और JDU एक सीट पर सिमट गई. 3 सीटें दूसरी पार्टियों के खाते में गई थीं. मगध में NDA की स्थिति और खराब है. मगध में विधानसभा की 51 सीटें हैं. इनमें महागठबंधन के पास 27 सीटें हैं. NDA के पास 17 और 7 सीटों पर अन्य का कब्जा है. पार्टी के हिसाब से देखें तो RJD की 23, BJP की 10, JDU की 7, कांग्रेस के पास 4 और अन्य के खाते में 7 सीट हैं. यहां की 7 लोकसभा सीटों में से 4 NDA और 3 महागठबंधन के पास है. NDA में BJP ने 2, HAM और JDU के पास एक-एक सीट जीती थी. महागठबंधन की तीनों सीटें RJD के पास हैं.
BJP के नेताओं में मनमुटाव और गुटबाजी दिख रही है. पार्टी का विस्तार होता है, तो गुटबाजी बढ़ती है. इसे खत्म किए बिना चुनाव जीतना नामुमकिन है. अमित शाह सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने आए थे. ‘इस बार का चुनाव काफी मुश्किल है. इससे पहले दो ध्रुव होते थे. इस बार कई पार्टियां एक्टिव हैं. ये महागठबंधन और NDA का खेल बिगाड़ेंगे. अमित शाह और PM मोदी इसे भांपते हुए लगातार दौरे कर रहे हैं. शाहाबाद में NDA की हालत पतली है. मुकाबला इतना टाइट है कि एक-दूसरे के मुद्दे छीने जा रहें हैं.’