Bihar Chunav:
Rahul Gandhi Bihar Visit
सिटी पोस्ट लाइव : पीएम मोदी नरेंद्र मोदी के बिहार दौरे के करीब एक हफ्ते बाद आज 6 जून को राहुल गांधी बिहार दौरे पर आ रहे हैं.राहुल नीतीश कुमार के गढ़ नालंदा में OBC-EBC सम्मेलन को संबोधित करेंगे.राहुल गांधी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश के गढ़ में घुसकर अत्यंत पिछड़ा वर्ग के वोट बैंक में सेंधमारी करने की कोशिश करेंगे. राहुल गांधी पहले गया और फिर राजगीर में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे. जानकारी के अनुसार राहुल गांधी सबसे पहले गया एयरपोर्ट पर उतरेंगे. वहां से वे दशरथ मांझी की प्रतिमा पर माल्यार्पण करेंगे. दशरथ मांझी के परिवार से मुलाकात करेंगे. राहुल गांधी महिलाओं के साथ संवाद करेंगे. गया के बाद राहुल गांधी राजगीर के लिए रवाना होंगे, जहां वे अतिपिछड़ा संवाद को संबोधित करेंगे.
राजगीर से राहुल गांधी वापस गया लौटेंगे और फिर दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगे. इस बार पटना में राहुल गांधी का कोई कार्यक्रम नहीं है. वहीं इस बीच बड़ा सवाल यह है कि राहुल गांधी ने इस बार लोगों से संवाद के लिए सीएम नीतीश कुमार का गढ़ कहे जाने वाले नालंदा जिले को ही क्यों चुना? राहुल गांधी 6 जून को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिला नालंदा के राजगीर में अत्यंत पिछड़ा वर्ग (OBC-EBC) सम्मेलन को संबोधित करने जा रहे हैं. यह उनका पिछले पांच महीनों में छठा बिहार दौरा है, जो कांग्रेस की आक्रामक रणनीति की योजना की कहानी को बयां करता है. लेकिन सवाल यह है कि नीतीश के गढ़ में राहुल गांधी की यह ‘हुंकार’ क्या महागठबंधन की एकता को मजबूत करेगी या नई चुनौतियां खड़ी करेगी?
नीतीश कुमार का गृह जिला नालंदा OBC और EBC वोटरों का गढ़ माना जाता है.बिहार की कुल आबादी में OBC और EBC का हिस्सा करीब 36 प्रतिशत है, जो किसी भी गठबंधन की जीत के लिए निर्णायक है. राहुल गांधी का इस क्षेत्र में OBC-EBC सम्मेलन को संबोधित करना एक रणनीति के तहत लिया हुआ कदम है. इस सम्मेलन में वह ‘पलायन रोको, नौकरी दो’ और ‘शिक्षा न्याय संवाद’ जैसे अभियानों के जरिए युवाओं, दलितों और अति पिछड़ा वर्ग को लुभाने की कोशिश करेंगे.
कांग्रेस का फोकस नीतीश के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने का है. राहुल गांधी नालंदा से पूरे बिहार को संदेश देने की कोशिश करेंगे कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीब 20 सालों के कार्यकाल में बिहार में रोजगार और शिक्षा के क्षेत्र में कुछ बड़ा काम नहीं हो पाया. कांग्रेस की यह रणनीति बिहार में अपनी खोई हुई जमीन को वापस पाने का हिस्सा है. दरअसल राहुल गांधी में बिहार में सोशल इंजीनियरिंग के फॉर्मूले पर काम कर रहे हैं. इससे पहले राहुल गांधी का दौरा दरभंगा-पटना हुआ, जहां राहुल गांधी ने दलितों और अल्पसंख्यकों को बड़ा मैसेज देने काम किया. वहीं राहुल गांधी राजगीर दौरे के जरिये बिहार अति पिछड़ों की आबादी को अपने पाले में करने की कोशिश में लगे हैं.
राहुल गांधी यह जानते हैं फिलहाल बिहार में सवर्ण कांग्रेस को छोड़ चुके हैं. ऐसे में अब वह दलितों, अल्पसंखयकों और अतिपिछड़ों के सहारे ही बिहार में कांग्रेस खोयी जमीन तलाशने और आरजेडी से अलग हटकर अपनी स्वतंत्र छवि बनाने में जुटे हैं.उन्हें पूरा भरोसा है कि दलितों-अति-पिछड़ों के जुड़ने के बाद सवर्ण समाज खुद साथ आ जाएगा.राहुल गांधी ने नालंदा को इसलिए भी चुना है कि क्यों यह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का गृह जिला है, यहां कुर्मी-कुशवाहा की बड़ी जनसंख्या को राहुल गांधी बड़ा मैसेज देकर कांग्रेस से जोड़ना चाह रहे हैं.
2020 के विधानसभा चुनाव में महागठबंधन के तहत कांग्रेस ने 70 सीटों पर चुनाव लड़ा था. लेकिन, केवल 19 सीटें जीत सकी थी. इसके लिए राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया था. इस बार, राहुल गांधी की लगातार बिहार यात्राएं-18 जनवरी, 4 फरवरी, 7 अप्रैल, 15 मई और अब 6 जून यह संकेत देती हैं कि कांग्रेस अपनी स्थिति को मजबूत करना चाहती है. साथ ही, वह RJD के नेतृत्व पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय अपनी स्वतंत्र पहचान बनाना चाहती है.ऐसी तैयारी में जुटी है कि अकेले मैदान में उतरना पड़े तो भी मुश्किल न हो.