सिटी पोस्ट लाइव :बिहार चुनाव को लेकर लगातार सामने आ रहे सर्वे के अनुसार NDA बहुत आगे है.अबतक सामने आये पांच ओपिनियन पोल के अनुसार एनडीए को स्पष्ट बहुमत मिलने की संभावना है. इतना ही नहीं एनडीए संभवतः 2010 के अपने ऐतिहासिक प्रदर्शन को पार कर सकता है. विधानसभा चुनाव 2025 के लिए हाल ही में प्रकाशित चार ओपिनियन पोल के अनुसार, एनडीए को 40-52% वोट शेयर और 130-158 सीटें मिलने की संभावना है जो 2020 के प्रदर्शन से काफी बेहतर है. चुनावी सर्वे के अनुमान हैं कि एनडीए 2010 वाली ऐतिहासिक जीत दोहरा सकती है जब उसने 39 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 243 में से 206 सीटें जीती थीं.मैट्रिक्स, जेवीसी ओपिनियन पोल, स्पीक मीडिया नेटवर्क और वोट वाइब के किए गए सर्वे एनडीए का वोट शेयर 40% से 52% के बीच और 130 से 158 सीटें मिलने का अनुमान जता रहे हैं. यह इसके 2020 विधानसभा के पिछले प्रदर्शन से काफी बेहतर है.
मैट्रिक्स सर्वे में एनडीए को 43% समर्थन मिलता हुआ दिखाई दे रहा है.इस सर्वे में नीतीश कुमार के शासन के प्रति 76% लोगों ने उनके काम से संतुष्टि जताई है. जब पूछा गया कि कौन सी पार्टी बिहार में अच्छा शासन दे सकती है तो 35% ने बीजेपी और 18% ने जदयू को चुना . सबसे चौंकाने वाला निष्कर्ष यह कि 20 साल के मुख्यमंत्री कार्यकाल के बावजूद 42% लोग नीतीश कुमार को ही मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं. यह सवाल कि अगर आज चुनाव हों तो कौन सा गठबंधन जीतना चाहिए में 52% लोगों ने एनडीए का समर्थन किया.एनडीए को 52% वोट शेयर मिलने की संभावना है. जाहिर है यह आंकड़ा महत्वपूर्ण है, क्योंकि 2010 में एनडीए ने केवल 39% वोट शेयर के साथ 206 सीटें जीती थीं.
76% लोग नीतीश के कामकाज से संतुष्ट हैं.42% लोग आज भी नीतीश को मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं.बिहार में अच्छा शासन के लिए 35% ने भाजपा और 18% ने जदयू को चुना.सुशासन के लिए एनडीए को कुल 43% समर्थन मिला.अगर आज चुनाव हों तो 52% लोग एनडीए को वोट देंगे.मैट्रिक्स के सर्वे के अनुसार भी एनडीए को 41-45% वोट शेयर और 131-150 सीटें मिलने का अनुमान जता रहा है. राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेतृत्व वाले महागठबंधन को 40% वोट और 81-103 सीटें मिलने की संभावना है. जन सुराज को 10-11% वोट और 4-6 सीटें मिल सकती हैं. नीतीश कुमार 27% समर्थन के साथ मुख्यमंत्री के लिए पहली पसंद बने हुए हैं, जबकि तेजस्वी यादव दूसरे स्थान पर हैं.
एनडीए को 41-45% वोट शेयर और 131-150 सीटों पर जीत का अनुमान दिया.महागठबंधन को 40% वोट और 81-103 सीटें मिलने की संभावना जताई गई.जन सुराज को 10-11% वोट और 4-6 सीटें मिल सकती हैं.मुख्यमंत्री की पसंद में नीतीश 27% पर सबसे आगे रहे, तेजस्वी यादव 25% पर दूसरे स्थान पर.स्पीक मीडिया नेटवर्क सर्वे में एनडीए को 46% वोट शेयर के साथ 158 सीटें मिल सकती हैं, जबकि महागठबंधन को 41% वोट के साथ 66 सीटें मिल सकती हैं. जन सुराज को 8% वोट मिलने की संभावना है, लेकिन सर्वे के अनुसार प्रशांत किशोर की पार्टी को कोई सीट नहीं मिलेगी. असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडियन मजलिस-ए-इत्तेहाद मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) को चार सीटें मिल सकती हैं.स्पीक मीडिया नेटवर्क ने एनडीए को और मजबूत स्थिति में दिखाया.एनडीए को 46% वोट शेयर और 158 सीटें मिलने की संभावना बताई.महागठबंधन को 41% वोट के साथ 66 सीटों तक सीमित बताया.
जन सुराज को 8% वोट लेकिन कोई सीट नहीं.एआईएमआईएम को 4 सीटें मिलने का अनुमान.
इस सर्वे ने सीधे वोटिंग प्राथमिकता के बजाय महागठबंधन की महिला रोजगार योजना (10,000 रुपये महिलाओं को) के प्रभाव पर सवाल पूछा. लगभग 34.9% लोगों ने कहा कि वे महागठबंधन को वोट देंगे, जबकि 34.8% ने एनडीए का समर्थन किया जो लगभग बराबरी की स्थिति बता रहा है. हालांकि, 5.8% लोग जो पहले महागठबंधन या जन सुराज को वोट देते थे, उन्होंने इस योजना के कारण एनडीए को वोट देने की बात कही जिससे एनडीए का वोट शेयर 40% से ऊपर चला गया.वोट वाइब के सर्वे में 34.9% लोगों ने कहा कि वे महागठबंधन को वोट देंगे.34.8% ने एनडीए को समर्थन जताया.5.8% लोगों ने कहा कि वे अपनी पुरानी पसंद छोड़कर एनडीए की योजनाओं की वजह से वोट देंगे.सर्वे का निष्कर्ष यही रहा कि एनडीए का वोट शेयर 40% से ऊपर जा सकता है.
कुल मिलाकर ये सर्वे बताते हैं कि एनडीए को 130-158 सीटें और 40-52% वोट शेयर मिलने की संभावना है जो 2020 के प्रदर्शन (125 सीटें, 37.26% वोट शेयर) से काफी बेहतर है. महागठबंधन को 37-41% वोट शेयर के साथ 66-103 सीटें मिलने का अनुमान है. इस चुनाव को बिहार के लिए “परिवर्तनकारी चुनाव” भी कहा जा रहा है. दरअसल, यह न केवल एनडीए की वापसी का संकेत है, बल्कि भविष्य में राज्य के नेतृत्व और राजनीतिक समीकरण में संभावित फेरबदल की भी ओर इशारा करता है.