सिटी पोस्ट लाइव : मुजफ्फरपुर के गायघाट में राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की यात्रा के दौरान उस समय अफरा तफरी मच गया जब निरंजन राय के खिलाफ नारे लगने लगे. मंच पर जब कांग्रेस और आरजेडी के बड़े नेता मौजूद थे, तभी स्थानीय आरजेडी विधायक निरंजन राय को कार्यकर्ताओं के भारी विरोध का सामना करना पड़ा.जब भीड़ बेकाबू हो गई और राहुल गांधी के सुरक्षा घेरे को तोड़ दिया तो सांसद पप्पू यादव ने मोर्चा संभाला.क्या हुआ इस यात्रा के दौरान और क्या हैं इसके मायने समझने के लिए बात करते हैं सिटी पोस्ट के संपादक ……………..
भीड़ में से ‘निरंजन राय मुर्दाबाद’ के नारे लगने लगे और कार्यकर्ता चिल्ला-चिल्लाकर उन्हें आगामी चुनाव में टिकट नहीं देने की मांग करने लगे. यह घटना सबके सामने हुई, जिससे गठबंधन के भीतर की गुटबाजी और स्थानीय नेताओं के प्रति कार्यकर्ताओं के असंतोष की तस्वीर साफ हो गई. यह सिर्फ एक नारेबाजी नहीं, बल्कि एक संदेश था कि भले ही शीर्ष नेतृत्व एक साथ मंच साझा कर रहा हो, लेकिन जमीनी स्तर पर सब कुछ ठीक नहीं है. इस विरोध से साफ है कि आरजेडी के लिए आगामी चुनाव में टिकट बंटवारा एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है.
जब राहुल और तेजस्वी गायघाट के शाही दरबार में ठहरे हुए थे और स्टालिन का इंतजार कर रहे थे, तभी भीड़ बेकाबू होने लगी. नेताओं के करीब जाने की होड़ में कार्यकर्ता सुरक्षा घेरा तोड़ने लगे. तभी, पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने अप्रत्याशित रूप से मोर्चा संभाला.पप्पू यादव ने खुद एक गार्ड की तरह भीड़ को नेताओं से दूर धकेलना शुरू कर दिया. वह राहुल और तेजस्वी के लिए रास्ता बनाते रहे और बेकाबू भीड़ को शांत करने की कोशिश की. राजनीतिक गलियारों में यह घटना खूब चर्चा बटोर रही है. जहां एक तरफ आरजेडी के अपने ही विधायक का विरोध हो रहा था, वहीं दूसरी तरफ पप्पू यादव जैसे नेता, जो अभी तक किसी गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं, ने सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाली.
ये कहना ठीक नहीं होगा कि पप्पू यादव का यह कदम महागठबंधन में अपने लिए जगह बनाने की कोशिश है? ये एक सहज प्रतिक्रिया भी हो सकती है. लेकिन यह घटना दर्शाती है कि बिहार की राजनीति में समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और आने वाले चुनाव में कई अप्रत्याशित गठबंधन और टकराव देखने को मिल सकते हैं.पप्पू यादव को फ्रंट फूट पर खेलने का मौका मिल सकता है.