लालू यादव की बिटिया के ज्ञान पर RJD प्रवक्तता ने उठाया सवाल, क्या है मकसद, समझा रहा विपक्ष.

Rahul
By Rahul

सिटी पोस्ट लाइव : लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्या राजनीति मे बहुत सक्रिय रहतीं हैं. हर मुद्दे पर ट्वीट करती नजर आती हैं. लेकिन इसबार राहुल गांधी के जन्म दिन पर किए गये उनके ट्वीट पर आरजेडी के ही राष्ट्रीय प्रवक्तता ने उन्हें समरस समाज और संत मूलक समाज के बीच का फर्क समझाने की कोशिश की है. विपक्ष अब सवाल उठा रहा है कि आरजेडी के राष्ट्रीय प्रवक्तता रोहिणी आचार्य का ज्ञान बढ़ा रहे हैं या उन्हें तेजप्रताप की तरह निबटाने की कोशिश कर रहे हैं.

दरअसल रोहिणी ने ट्वीट किया-“ सामाजिक न्याय और समरस समाज की स्थापना के लिए संकल्पित लोक सभा नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी जी को जन्म दिन की हार्दिक बधाई व अनंत सुभेच्छाएं “ रोहिणी के इस ट्वीट को आरजेडी प्रवकत्ता ने री-ट्वीट करके रोहिणी की अज्ञानता को सार्वजनिकरूप से उजागर कर दिया। उन्होंने लिखा- “ समरस समाज नहीं,” समतामूलक समाज की स्थापना के लिए संकल्पित हैं राहुल गांधी जी.

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समरस समाज की स्थापना के लिए संकल्पित हैं मोहन भागवत जी. समरस समाज और समतामूलक समाज मे वहीं अंतर है जो भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल के बीच है. सत्यमेव जयते.

जाहिर  है आरजेडी के राष्ट्रीय प्रवक्तता ने अपनी पार्टी के नेत्री के बारे मे ये बात दिया है कि उन्हें अभी राजनीति समझ मे नहीं आती। उन्हें बीजेपी और आरजेडी के बीच के विचारधारा के बारे मे कोई जानकारी नहीं. विपक्ष के नेता आरोप लगा रहे हैं कि तेजस्वी यादव रोहिणी आचार्य को टेजप्रताप यादव की तरह निबटाना चाहते हैं. उनके ईशारे पर ही पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्तता ने उनके ट्वीट पर री-ट्वीट कर सवाल उठाया है. संदेश साफ है आगे से रोहीनों को कोई भी ट्वीट करने से पहले पार्टी से अपरोवल लेना पड़ेगा.

आइए जानते हैं क्या फरक है समतामूलक और समरस समाज के बीच. किसे समरस समाज और किसे समतामूलक समाज कहते हैं.     

समरस समाज और समतामूलक समाज दो अलग-अलग अवधारणाएँ हैं, हालांकि वे एक-दूसरे से संबंधित हैं. समतामूलक समाज (Egalitarian society) का अर्थ है एक ऐसा समाज जहाँ सभी व्यक्तियों को समान माना जाता है, और जहाँ किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होता है.  इसका मतलब है कि सभी को समान अधिकार, अवसर और संसाधन प्राप्त होते हैं, चाहे उनकी सामाजिक, आर्थिक, या व्यक्तिगत स्थिति कुछ भी हो.  

समरस समाज (Harmonious society) का अर्थ है एक ऐसा समाज जहाँ सभी लोग एक-दूसरे के साथ सद्भाव और सम्मान के साथ रहते हैं.  इसका मतलब है कि विभिन्न पृष्ठभूमि, संस्कृति और विचारों के लोग एक-दूसरे के साथ मिलजुलकर रहते हैं, और एक-दूसरे का सम्मान करते हैं. मुख्य अंतर यह है कि समतामूलक समाज समानता पर केंद्रित है, जबकि समरस समाज सद्भाव और एकीकरण पर केंद्रित है।  

समतामूलक समाज समानता पर जोर देता है, जबकि समरस समाज सद्भाव और एकीकरण पर जोर देता है.समतामूलक समाज में, सभी को कानूनी और सामाजिक अधिकार समान रूप से प्राप्त होते हैं.  समरस समाज में, विभिन्न पृष्ठभूमि के लोग एक-दूसरे के साथ सद्भाव में रहते हैं, भले ही उनके कानूनी और सामाजिक अधिकार समान न हों.

समतामूलक समाज में, संसाधनों का समान वितरण होता है, ताकि सभी को समान अवसर मिलें.  समरस समाज में, संसाधनों का समान वितरण आवश्यक नहीं है, लेकिन विभिन्न समूहों के बीच सद्भाव और सहयोग होना चाहिए.समतामूलक समाज में, किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होता है.  समरस समाज में, विभिन्न समूहों के बीच भेदभाव हो सकता है, लेकिन फिर भी उनके बीच सद्भाव और सहयोग होता है. उदाहरण के लिए, एक समतामूलक समाज में, सभी बच्चों को समान शिक्षा का अधिकार होगा, चाहे उनके माता-पिता गरीब हों या अमीर.  एक समरस समाज में, विभिन्न जातियों के बच्चे एक साथ खेल सकते हैं और एक-दूसरे के साथ घुलमिल सकते हैं, भले ही उनकी सामाजिक स्थिति अलग-अलग हो.  

संक्षेप में, समतामूलक समाज समानता पर केंद्रित है, जबकि समरस समाज सद्भाव और एकीकरण पर केंद्रित है.  दोनों ही अवधारणाएं एक बेहतर समाज के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन वे अलग-अलग पहलुओं पर जोर देती हैं. इसलिए आरजेडी के राष्ट्रीय प्रवक्तता को सार्वजनिक मंच से पार्टी की नेत्री रोहिणी आचार्या को ज्ञान देने की जरूरत नहीं थी. आम जनता के लिए समरस और समतामूलक समाज के बीच के बारीक अंतर की समझ नहीं है और अगर है भी तो उन्हें कोई ज्यादा फरक नहीं पड़ता. क्या बड़ा ज्ञान देनेवाले आरजेडी के ज्ञानी प्रवक्तता को इतनी छोटी बात समझ मे नहीं आई ?

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