बिहार भाजपा: 24 से अधिक विधायकों का टिकट कटना तय! पूर्व सांसदों को मैदान में उतारने की तैयारी

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections)
की घोषणा से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। केंद्रीय नेतृत्व ने राज्य की 125 सीटों पर विस्तृत फीडबैक रिपोर्ट पूरी कर ली है। पार्टी के सूत्रों के हवाले से यह खबर सामने आई है कि चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में टिकट वितरण को लेकर बड़े और कड़े फैसले लिए गए हैं, जिस पर लगभग अंतिम मुहर लग चुकी है।

बैठक में 600 से अधिक संभावित उम्मीदवारों के नामों पर गहन चर्चा की गई। सबसे बड़ा निर्णय यह लिया गया है कि पार्टी इस बार दो दर्जन (24) से अधिक मौजूदा विधायकों का टिकट काटने जा रही है। भाजपा नेतृत्व का मानना है कि जिन विधायकों का प्रदर्शन अपने क्षेत्र की जनता के बीच कमजोर रहा है, या जिनके खिलाफ जन-असंतोष की खबरें हैं, उन्हें दोबारा मौका नहीं दिया जाएगा। पार्टी का स्पष्ट संदेश है कि इस बार चुनाव सिर्फ ‘जीतने वाले उम्मीदवार’ के आधार पर लड़ा जाएगा।

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नए चेहरों को मिलेगा मौका, पूर्व सांसद होंगे मैदान में
वर्तमान विधायकों का टिकट कटने के बाद भाजपा अब कई सीटों पर नए चेहरों को मैदान में उतारने की योजना बना रही है। विशेष रूप से, लोकसभा चुनाव में हारने वाले पूर्व सांसदों और संगठन में सक्रिय कार्यकर्ताओं को टिकट वितरण में प्राथमिकता दी जा सकती है। इसके साथ ही, युवाओं और महिलाओं को भी इस बार बड़ी संख्या में मौका देने की तैयारी है ताकि टिकट वितरण में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बना रहे। पार्टी का लक्ष्य है कि एक मजबूत और जुझारू टीम तैयार की जाए जो स्वच्छ छवि और संगठन के प्रति वफादारी रखती हो।

सूत्रों के अनुसार, कुछ सीटों पर उम्मीदवारों की ‘अदला-बदली’ का फॉर्मूला भी अपनाया जा सकता है। यानी, जिस सीट पर वर्तमान विधायक कमजोर हैं, वहां किसी दूसरे प्रभावशाली नेता को उतारा जा सकता है। टिकट वितरण की दिशा लगभग तय कर दी गई है और अगली चरण की बैठक में अंतिम नामों की घोषणा हो सकती है।

बागियों पर गाज, इन विधायकों पर कट सकती है टिकट
पार्टी के भीतर अनुशासनहीनता और कमजोर प्रदर्शन करने वाले विधायकों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, अलीपुर के विधायक मिश्रा लाल यादव, नरकटियागंज की रश्मि वर्मा, और रामनगर की भागीरथी देवी का टिकट कटने की चर्चा जोरों पर है। इसके अलावा, लोरैया के विधायक विनय बिहारी को लेकर भी पार्टी के भीतर संशय की स्थिति बनी हुई है।

बताया गया है कि इस बार 80 वर्तमान विधायकों ने दोबारा चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है, लेकिन 52 संगठनात्मक जिलों के कोर ग्रुप से 500 से अधिक और सीधे प्रदेश संगठन के पास 100 से अधिक दावेदारों के नाम आए हैं। कई सीटों पर तो एक दर्जन से ज्यादा दावेदार हैं। अब इन नामों को छांटकर पहले सात और फिर अंतिम बैठक में तीन तक सीमित किया जाएगा।

भाजपा नेतृत्व का स्पष्ट मानना है कि सिर्फ पुराने चेहरों के भरोसे नहीं रहा जाएगा। सभी संभावित उम्मीदवारों के प्रदर्शन, जनसंपर्क, संगठनात्मक जुड़ाव और जनता के बीच छवि जैसे मानकों पर कड़े मूल्यांकन के बाद ही टिकट दिया जाएगा। पार्टी का यह कदम साफ संकेत देता है कि वह इस विधानसभा चुनाव में किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी और ‘जीतने वाला उम्मीदवार, साफ छवि और संगठन के प्रति वफादारी’ के सिद्धांत पर आगे बढ़ेगी।

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