सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले जनता दल यूनाइटेड (JDU) को खगड़िया जिले में बड़ा झटका लगा है। परबत्ता विधानसभा क्षेत्र के मौजूदा विधायक और इलाके के कद्दावर नेता डॉ. संजीव कुमार ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का दामन थाम लिया है। उनकी इस घोषणा के बाद न केवल खगड़िया जिले की राजनीति में हलचल मच गई है, बल्कि महागठबंधन को ब्राह्मण-भूमिहार (ब्रह्मर्षि) समुदाय के बीच एक मजबूत चेहरा मिल गया है।
नीतीश और नेतृत्व से थी लंबी नाराजगी
डॉ. संजीव कुमार के RJD में शामिल होने के कयास लंबे समय से लगाए जा रहे थे। उनकी पार्टी नेतृत्व से नाराजगी खुलकर सामने आ गई थी।
सरकारी कार्यक्रमों से दूरी: बीते दिनों मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जब परबत्ता विधानसभा क्षेत्र के सतीश नगर गांव में पूर्व मुख्यमंत्री सतीश प्रसाद सिंह की प्रतिमा के अनावरण के लिए पहुंचे थे, तब भी विधायक डॉ. संजीव कुमार वहां मौजूद नहीं थे।
सार्वजनिक हमला: वह बार-बार पार्टी की नीतियों और मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर सार्वजनिक रूप से हमला करते रहे थे।
व्यक्तिगत टकराव: उनकी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के सांसद राजेश वर्मा से पुरानी अदावत रही है, साथ ही सूत्रों के अनुसार उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से भी उनके संबंध सहज नहीं थे, जिनका खगड़िया की राजनीति में दखल रहा है।
स्वाभिमान का हवाला: डॉ. संजीव कुमार ने बार-बार कहा है कि उन्होंने ‘स्वाभिमान से समझौता नहीं’ किया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पार्टी के भीतर उपेक्षा ही उनके इस बड़े फैसले का मुख्य कारण बनी। मालूम हो कि फरवरी 2024 में बिहार विधानसभा के विश्वास मत से पहले विधायकों की खरीद-फरोख्त प्रकरण में भी डॉ. संजीव कुमार का नाम सामने आया था और आर्थिक अपराध इकाई ने उन्हें नोटिस जारी किया था।
राजद को मिला ‘सवर्ण’ चेहरा, NDA के कोर वोट बैंक पर असर
डॉ. संजीव कुमार का RJD में जाना खगड़िया की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ है।
ब्रह्मर्षि समाज का नेतृत्व: वह खगड़िया में घोषित सवर्ण (ब्रह्मर्षि) चेहरे हैं और उन्होंने हाल ही में पटना के एसके मेमोरियल हॉल में एक सफल राज्य स्तरीय ब्रह्मर्षि सम्मेलन का आयोजन भी किया था। उनके पिता आरएन सिंह परबत्ता से पाँच बार विधायक रहे और नीतीश सरकार में मंत्री भी थे।
प्रभाव का विस्तार: डॉ. संजीव कुमार के इस कदम से न केवल खगड़िया, बल्कि बगल के भागलपुर (थाना बिहपुर) और बेगूसराय जिले में भी NDA के कोर सवर्ण वोट बैंक पर गहरा प्रभाव पड़ने की आशंका है।
परबत्ता सीट पर NDA में बढ़ी दावेदारी और अटकलें
डॉ. संजीव कुमार के जाने के बाद अब परबत्ता सीट पर NDA के भीतर सियासी समीकरण तेजी से बदल गए हैं। एनडीए में यह सीट अब भाजपा के खाते में जा सकती है, जिसने बीते विधानसभा चुनाव में खगड़िया जिले में एक भी सीट नहीं जीती थी।
सम्राट चौधरी का नाम: अंदरखाने यह चर्चा है कि उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी खुद इस सीट से चुनाव लड़ सकते हैं या पार्टी उन्हें यहां से लड़ा सकती है। हालांकि, सम्राट चौधरी के पटना से चुनाव लड़ने की अटकलें भी हैं।
नए नाम: जम्मू एवं कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के पुत्र अभिनव सिन्हा (जिनका ससुराल परबत्ता में है) और भाजपा प्रदेश प्रवक्ता डॉ. सुहेली मेहता (जो कुशवाहा समुदाय से हैं) का नाम भी दावेदारों में सामने आ रहा है।
जदयू की चुनौती: जदयू से पूर्व मुख्यमंत्री सतीश प्रसाद सिंह के पुत्र सुनील कुमार (कुशवाहा) मजबूत दावेदार बने हुए हैं।
फिलहाल, डॉ. संजीव कुमार का यह फैसला बिहार की राजनीति में दल-बदल की राजनीति को गरमा गया है और परबत्ता सीट पर एनडीए के लिए टिकट बंटवारे का पेच फंस गया है।