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बिहार की राजनीति के सबसे चर्चा में रहने वाले चेहरों में से एक, तेज प्रताप यादव ने एक बार फिर सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से निष्कासित होने के बाद अपनी नई राह चुन चुके तेज प्रताप ने शनिवार को औपचारिक घोषणा की कि उनकी पार्टी जनशक्ति जनता दल (JJD) आगामी बिहार विधान परिषद (MLC) चुनावों में पूरी मजबूती के साथ उतरेगी।
स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों पर नजर
वैशाली में पत्रकारों से बात करते हुए तेज प्रताप यादव ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की खाली हो रही सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। गौरतलब है कि बिहार विधान परिषद के आठ सदस्यों का कार्यकाल 16 नवंबर को समाप्त हो रहा है। इनमें चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। तेज प्रताप की इस घोषणा के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या वह अपने पिता लालू प्रसाद यादव के वोट बैंक में सेंधमारी कर पाएंगे या नहीं।
किन सीटों पर होगा मुकाबला?
चुनाव आयोग के अनुसार, सितंबर या अक्टूबर में इन सीटों पर मतदान संभावित है। जिन क्षेत्रों में चुनाव होने हैं, वे इस प्रकार हैं:
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र: पटना, तिरहुत, दरभंगा और कोसी।
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: पटना, तिरहुत और दरभंगा।
इन सीटों पर फिलहाल कई दिग्गज नेता काबिज हैं, जिनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इनमें जेडीयू के नीरज कुमार, बीजेपी के नवल किशोर यादव और कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा जैसे कद्दावर नाम शामिल हैं। इन दिग्गजों के खिलाफ तेज प्रताप के उम्मीदवारों का उतरना मुकाबले को त्रिकोणीय बना सकता है।
पारिवारिक विवाद और ‘JJD’ का उदय
तेज प्रताप यादव को उनके पिता लालू प्रसाद यादव ने पिछले साल 25 मई को छह साल के लिए आरजेडी से निष्कासित कर दिया था। निष्कासन की मुख्य वजह एक सोशल मीडिया विवाद और उनके द्वारा कथित ‘गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार’ को बताया गया था। तब से तेज प्रताप अपनी पार्टी ‘जनशक्ति जनता दल’ को खड़ा करने में जुटे हैं। हालांकि, विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी, लेकिन अब विधान परिषद के जरिए वह सदन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाहते हैं।
विधान परिषद का गणित
बिहार विधान परिषद में कुल 75 सदस्य होते हैं। यह उच्च सदन एक स्थायी निकाय है, जिसके सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है और प्रत्येक दो वर्ष में एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं। स्नातक क्षेत्रों में करीब 4.84 लाख और शिक्षक क्षेत्रों में 45 हजार से अधिक मतदाता पंजीकृत हैं। तेज प्रताप के लिए इन प्रबुद्ध मतदाताओं को साधना एक बड़ी चुनौती होगी।