बिहार की हार के बाद नई सियासी चाल? राजस्थान में नई पारी की तैयारी में प्रशांत किशोर…

Ritu Raj

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में करारी हार के बावजूद जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर की राजनीतिक कहानी यहीं खत्म नहीं होती। उनके लिए यह चुनाव पहले से ही एक रणनीतिक प्रयोग था, जहां जीत या हार से ज्यादा अहम आंकलन और अनुभव थे। ‘या तो 200 पार या कुछ नहीं’ के अपने दांव पर अड़े प्रशांत किशोर भले अपेक्षित नतीजे हासिल नहीं कर सके, लेकिन चुनावी प्रबंधन, रणनीति और संसाधन संचालन में उनकी दक्षता एक बार फिर साबित हुई है। वहीं, अब माना जा रहा है कि प्रशांत किशोर एक बार फिर अपने मूल कौशल चुनावी प्रबंधन और रणनीतिक सलाह के दम पर नई राजनीतिक जमीन तलाशने की तैयारी में हैं।

चुनावी रणनीति के माहिर माने जाने वाले प्रशांत किशोर अब अपने कौशल का अगला प्रयोग राजस्थान की सियासी जमीन पर कर सकते हैं। हाल के दिनों में राजस्थान के नेता नरेश मीणा से उनकी मुलाकात और उससे जुड़ी तस्वीर सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में नई अटकलें तेज हो गई हैं। चर्चा है कि नरेश मीणा राज्य में तीसरा मोर्चा खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं और इसमें विभिन्न दलों को एक मंच पर लाने के लिए प्रशांत किशोर की रणनीतिक भूमिका अहम हो सकती है। आम आदमी पार्टी, आरएलपी और आज़ाद समाज पार्टी जैसे दलों को साथ लाने की कवायद इसी दिशा में देखी जा रही है, जहां चुनावी प्रबंधन और राजनीतिक तालमेल बनाने की जिम्मेदारी प्रशांत किशोर के अनुभव पर टिक सकती है। हालांकि राजस्थान की सक्रियता के बावजूद प्रशांत किशोर का बिहार से जुड़ाव बना हुआ है। बिहार को बदलने का उनका सपना अब भी बरकरार है और वे बार-बार यह दोहराते रहे हैं कि राज्य की राजनीति को जाति और धर्म के दायरे से बाहर निकालना जरूरी है। शिक्षा, रोजगार और कृषि आधारित उद्योगों के जरिए बिहार की छिपी संभावनाओं को सामने लाने का उनका विज़न अब भी जन सुराज की नींव में शामिल है। यही कारण है कि चुनावी नतीजों के बाद भी वे बिहार में संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं, जबकि दूसरी ओर चुनावी प्रबंधन के जरिए नए राजनीतिक प्रयोग की राह भी तलाश रहे हैं।

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माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव की हार ने प्रशांत किशोर को झकझोरा जरूर है, लेकिन उनके दीर्घकालिक लक्ष्य पर इसका असर नहीं पड़ा। सूत्रों के अनुसार अब पीके अपनी सियासी सक्रियता को जमीनी स्तर तक ले जाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं और आगामी नगर व पंचायत चुनावों को अगला फोकस बनाने की तैयारी में हैं। इसके लिए वे जल्द ही बिहार दौरे का कार्यक्रम तय कर रहे हैं, जिसमें दक्षिण बिहार के जिलों पर विशेष ध्यान रहेगा। संकेत हैं कि इसी महीने वह क्षेत्रीय भ्रमण करते हुए संगठन को मजबूत करने, स्थानीय मुद्दों को समझने और कैडर को सक्रिय करने की दिशा में कदम बढ़ाते नजर आ सकते हैं।

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