टैरिफ तनाव के बीच पीएम मोदी ने ठुकराए ट्रंप के 4 कॉल, चीन की ओर रुख संभव ?

Deepak Sharma

सिटी पोस्ट लाइव
अमेरिका के साथ भारत के संबंधों में तनाव बढ़ता जा रहा है, और इसकी वजह है व्यापार को लेकर चल रहा विवाद। इसी बीच, एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। जर्मन अखबार ‘फ्रैंकफर्टर ऑलगेमाइन ज़ितुंग (FAZ)’ और जापानी अखबार ‘निक्केई एशिया’ की रिपोर्टों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल के हफ्तों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चार फोन कॉल का जवाब देने से इनकार कर दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह पीएम मोदी के गहरे गुस्से और सावधानी का परिणाम है।

ट्रंप की आक्रामक टैरिफ नीति

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यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब अमेरिका ने भारतीय सामानों पर टैरिफ दोगुना कर दिया है, जिससे यह दर 50 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह दर ब्राजील को छोड़कर किसी भी अन्य देश पर लगाए गए टैरिफ से सबसे ज्यादा है। इसमें रूस से कच्चा तेल खरीदने पर लगाया गया 25 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क भी शामिल है। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अमेरिका के दबाव के आगे नहीं झुकेगा और प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों के हितों से कभी समझौता न करने की शपथ ली है। जर्मन रिपोर्ट बताती है कि इस व्यापारिक टकराव से साफ है कि नई दिल्ली वॉशिंगटन के दबाव में नहीं आएगी, और यह भी संकेत मिलता है कि पीएम मोदी ट्रंप की कार्यशैली से अपमानित महसूस कर रहे हैं।

पाकिस्तान और चीन की भूमिका

अमेरिकी राष्ट्रपति की भारत-विरोधी बयानों ने भारत में उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया है। खासकर, पाकिस्तान के साथ संबंधों को बढ़ावा देने की उनकी योजनाएं और भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता के उनके दावों को भारत ने खारिज कर दिया है। विश्लेषकों का मानना ​​है कि ट्रंप की “शो-ऑफ” और “डील-केंद्रित” कूटनीति दोनों देशों के संबंधों में एक और तनाव का कारण बन गई है।

भारत का चीन की ओर झुकाव

अमेरिका के साथ बढ़ते व्यापारिक तनाव ने भू-राजनीतिक समीकरणों को भी बदल दिया है। विश्लेषक मार्क फ्रेजियर ने दावा किया है कि चीन को रोकने के लिए भारत को एक महत्वपूर्ण भूमिका देने की अमेरिका की “इंडो-पैसिफिक” रणनीति “टूट रही है”। फ्रेजियर के अनुसार, नई दिल्ली कभी भी बीजिंग के खिलाफ अमेरिका का पक्ष लेने का इरादा नहीं रखती थी, और दोनों देशों के वैश्विक संस्थानों में प्रभाव बढ़ाने के समान हित हैं। चीनी निवेश और तकनीक भारतीय उद्योग को बढ़ावा दे सकते हैं, जबकि भारत वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक स्थिति में चीन के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

आधिकारिक यात्रा और भविष्य की रणनीति

इन सभी घटनाक्रमों के बीच, पीएम मोदी शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए अगस्त के अंत में चीन की यात्रा करने वाले हैं। यह पीएम मोदी की चीन की पहली यात्रा होगी, और इसे अमेरिका-चीन संबंधों की अप्रत्याशित दिशा पर नजर रखते हुए बीजिंग के साथ तनाव कम करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। कुल मिलाकर, अमेरिका की आक्रामक व्यापार नीतियां और पाकिस्तान के प्रति उसके झुकाव ने भारत को एक नया रास्ता खोजने पर मजबूर कर दिया है, जो संभवतः चीन के साथ संबंधों को मजबूत करने की ओर इशारा करता है।

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