सिटी पोस्ट लाइव
बिहार में विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) को एक ही चरण में कराए जाने की मांग एक बार फिर से जोर पकड़ रही है। राज्य के चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो अब तक तीन बार ऐसा हो चुका है जब पूरे बिहार में एक ही दिन मतदान (Single-Phase Voting) संपन्न कराया गया था। राजनीतिक विश्लेषक इसे सुरक्षा, प्रशासनिक सुविधा और लागत में कमी के लिहाज से अहम बता रहे हैं, जिसके कारण यह मांग फिर से उठ रही है।
बिहार में 1952 में पहले आम चुनाव (First General Elections) से लेकर अब तक विधानसभा चुनाव एक से लेकर छह चरणों में हुए हैं। हालांकि, तीन मौके ऐसे भी आए जब निर्वाचन आयोग (Election Commission) ने राजनीतिक दलों की सहमति से पूरे राज्य में सिर्फ एक दिन में मतदान करा दिया।
तीन बार हुआ एक ही दिन मतदान
बिहार में पहली बार मध्यावधि चुनाव (Mid-term Elections) 1969 में हुआ, जब 1967 के चौथे आम चुनाव के बाद बिहार विधानसभा का विघटन हो गया था। इस दौरान राज्य में राष्ट्रपति शासन (President’s Rule) प्रभावी था। निर्वाचन आयोग ने राजनीतिक दलों की सहमति से पहली बार 9 फरवरी, 1969 को पूरे राज्य में सिर्फ एक ही दिन मतदान संपन्न कराया था।
इसके बाद, 1980 के विधानसभा चुनाव के लिए भी एक ही दिन में मतदान 31 मई को संपन्न हुआ था। ठीक दस साल बाद, 1990 के विधानसभा चुनाव में भी 27 फरवरी को पूरे राज्य में एक ही दिन मतदान हुआ था। यह दर्शाता है कि पहले भी बड़े स्तर पर चुनावी प्रक्रिया को एक ही दिन में सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है।
छह चरण तक भी पहुंचे हैं चुनाव
जहां तीन बार एक दिन में मतदान हुआ, वहीं कई बार चुनाव कई चरणों में संपन्न कराए गए हैं। सबसे ज्यादा छह चरणों में मतदान 2010 के विधानसभा चुनाव में हुआ था। यह चुनाव 21, 24 व 28 अक्टूबर तथा 1, 9 व 20 नवंबर को हुए थे। 1995 में पांच चरणों में, 2015 में भी पांच चरणों में मतदान हुआ था। हालिया 2020 का चुनाव तीन चरणों (28 अक्टूबर, 3 और 7 नवंबर) में संपन्न हुआ था। सबसे पहले 1952 का आम चुनाव 21 दिनों तक चला था, जबकि 1957 में 16 दिनों में मतदान हुआ था। 1962 और 1967 में चार-चार चरणों में मतदान हुआ था।
पांच बार राष्ट्रपति शासन में हुए विधानसभा चुनाव
बिहार के चुनावी इतिहास का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि राज्य में पांच बार विधानसभा चुनाव राष्ट्रपति शासन के दौरान हुए हैं। ये चुनाव 1969, 1972, 1977, 1980 और अक्टूबर 2005 में संपन्न हुए थे। विशेष रूप से 2005 में, फरवरी के चुनाव में किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के कारण राष्ट्रपति शासन लगा और इसी शासन के दौरान अक्टूबर-नवंबर में फिर से विधानसभा चुनाव के लिए मतदान हुआ, जिसके बाद राजग को स्पष्ट बहुमत मिला और नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने। गौरतलब है कि निर्वाचन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में लोकसभा का चुनाव कभी भी राष्ट्रपति शासन में नहीं हुआ है।
राज्य में तीन बार एक ही दिन में मतदान की सफलता को देखते हुए, प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में यह मांग जोर पकड़ रही है कि आगामी विधानसभा चुनाव को भी एक ही चरण में कराकर एक मिसाल पेश की जाए।