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बिहार की मोकामा विधानसभा सीट से जेल में रहते हुए शानदार जीत दर्ज करने वाले बाहुबली नेता अनंत सिंह के परिवार ने दिल्ली में सियासी हलचल तेज कर दी है। अनंत सिंह के दोनों बेटों, अंकित और अभिषेक ने अपनी माँ नीलम देवी के साथ केंद्रीय मंत्री और जदयू के दिग्गज नेता ललन सिंह से मुलाकात की है। इस मुलाकात के बाद बिहार के राजनीतिक गलियारों में कयासों का बाजार गर्म हो गया है।
मुलाकात के पीछे क्या है बड़ा मकसद?
ललन सिंह और अनंत सिंह के परिवार की इस मुलाकात को दो मुख्य कोणों से देखा जा रहा है। पहला, अनंत सिंह के दोनों बेटों की सक्रिय राजनीति में एंट्री। माना जा रहा है कि अंकित और अभिषेक जल्द ही जदयू का दामन थाम सकते हैं और आगामी चुनावों में पार्टी के चेहरे बन सकते हैं। दूसरा महत्वपूर्ण कारण अनंत सिंह की जेल से रिहाई और उनके कानूनी मामलों को लेकर चर्चा बताई जा रही है।
जेल की सलाखों के पीछे से दर्ज की ऐतिहासिक जीत
अनंत सिंह फिलहाल पटना की बेऊर जेल में बंद हैं। हालिया विधानसभा चुनाव के दौरान मोकामा में चुनावी हिंसा हुई थी, जिसमें जन सुराज समर्थित दुलारचंद यादव की मृत्यु हो गई थी। इस मामले में मुख्य आरोपी बनाए जाने के बाद अनंत सिंह को 6 नवंबर से पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया था। जेल में होने के बावजूद अनंत सिंह ने लोजपा (रामविलास) की प्रत्याशी वीणा देवी को करीब 28 हजार वोटों के भारी अंतर से शिकस्त दी।
विधायकी बचाने की चुनौती और 6 महीने की डेडलाइन
चुनाव जीतने के बावजूद अनंत सिंह ने अभी तक विधायक पद की शपथ नहीं ली है। संवैधानिक नियमों के अनुसार, किसी भी नवनिर्वाचित विधायक को 6 महीने के भीतर शपथ लेना अनिवार्य होता है। यदि अनंत सिंह इस अवधि में जेल से बाहर नहीं आते या उन्हें शपथ लेने की अनुमति नहीं मिलती, तो मोकामा सीट पर दोबारा संकट खड़ा हो सकता है और उनकी विधायकी जा सकती है। इसी तकनीकी पेंच को सुलझाने के लिए उनके परिवार की ललन सिंह से मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा है।
क्या जदयू का नया चेहरा बनेंगे अंकित और अभिषेक?
बिहार में फिलहाल जदयू का सदस्यता अभियान चल रहा है। सूत्रों की मानें तो अनंत सिंह के बेटे युवा चेहरे के तौर पर पार्टी को मोकामा और आसपास के क्षेत्रों में मजबूती दे सकते हैं। अनंत सिंह खुद जदयू के टिकट पर जीते हैं, ऐसे में उनके बेटों का राजनीतिक भविष्य भी नीतीश कुमार की पार्टी के साथ ही जुड़ता दिख रहा है।