बेतिया नगर निगम बना अजूबा, सांसद संजय जायसवाल ने खोली पोल

Manisha Kumari

सिटी पोस्ट लाइव

बेतिया: बेतिया नगर निगम की बैठक इस बार चर्चा का केंद्र बन गई, जब लोकसभा सचेतक और प. चंपारण के सांसद डॉ. संजय जायसवाल ने नगर निगम की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए नगर आयुक्त से पूर्व की बैठकों और प्रोसीडिंग्स से जुड़े कागजात मांगे। लेकिन नगर आयुक्त के पास न तो पूरे दस्तावेज थे और न ही कोई ठोस जवाब। इस पर सांसद ने कड़ी नाराजगी जताई और निगम प्रशासन को आड़े हाथों लिया। 

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बैठक में सांसद डॉ. संजय जायसवाल ने महापौर और नगर आयुक्त को स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह बैठक बेतिया के विकास के लिए हो रही है, न कि राजनीतिक दिखावे के लिए। उन्होंने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि सदन में सिर्फ उन्हीं लोगों को मौजूद रहने की अनुमति है, जो इसके सदस्य हैं या फिर वे गणमान्य नागरिक, जिनकी सूची नगर आयुक्त द्वारा आधिकारिक रूप से प्रस्तुत की गई हो। लेकिन नगर निगम प्रशासन ने इस नियम की धज्जियां उड़ा दीं।

सांसद जायसवाल ने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण का भी नगर निगम में खुलेआम मजाक बनाया जा रहा है। चुनी हुई महिला पार्षदों की जगह उनके पति बैठक में मौजूद थे, जो पूरी तरह से गलत और असंवैधानिक है। उन्होंने इस मुद्दे को विभागीय मंत्री और एसीएस (अपर मुख्य सचिव) के समक्ष उठाने की चेतावनी दी और सख्त कार्रवाई की मांग की। 

जब सांसद जायसवाल ने नगर आयुक्त से बैठक से संबंधित सभी कागजात प्रस्तुत करने को कहा, तो उन्हें आधे-अधूरे दस्तावेज दिए गए। इतना ही नहीं, जब गणमान्य नागरिकों की सूची मांगी गई, तो 20 लोगों की जगह सिर्फ 12 के नाम बताए गए। जैसे ही नाम पुकारे जाने लगे, वैसे ही अवैध रूप से बैठे लोग धीरे-धीरे बैठक से खिसकने लगे।

बैठक में मौजूद एमएलसी ई. सौरभ कुमार ने सांसद डॉ. संजय जायसवाल के उठाए गए मुद्दों का समर्थन करते हुए कहा कि, जो आवाज सांसद ने उठाई है, वह पूरी तरह जायज़ और सराहनीय है। मैं इसका पूरा समर्थन करता हूं और इसे आगामी विधानसभा सत्र में भी उठाऊंगा।

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