शिक्षकों के स्थानांतरण से जुदा बड़ा फैसला-अब नहीं होगा झोल, जिला स्थापना समिति करेगी ट्रांसफर-पोस्टिंग

Deepak Sharma

सिटी पोस्ट लाइव
शिक्षकों के बीच नई तबादला नीति को लेकर बढ़ रही नाराजगी को दूर करने का निर्देश मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शिक्षा विभाग को दे चुके हैं उसका असर अब दिखाई देने लगा है। शिक्षकों के स्थानांतरण संबंधी मामलों पर विचार के लिए प्रत्येक जिला में जिला स्थापना समिति गठित की जाएगी। जिला स्थापना समिति के अध्यक्ष में जिलाधिकारी होंगे। दरअसल, मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद शिक्षा विभाग ने शिक्षकों के स्थानांतरण प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से ये अहम फैसला लिया है। मंगलवार को विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, अब प्रत्येक जिले में शिक्षकों के स्थानांतरण मामलों पर विचार हेतु जिला स्थापना समिति गठित की जाएगी। यह समिति शिक्षकों के स्थानांतरण के प्रस्तावों की समीक्षा कर आवश्यक अनुशंसा प्रदान करेगी।

प्रत्येक जिला में गठित होने वाली इस समिति की अध्यक्षता संबंधित जिलाधिकारी करेंगे। समिति में उप विकास आयुक्त और अपर जिला दंडाधिकारी को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है. जिला शिक्षा पदाधिकारी को समिति का। सदस्य सचिव बनाया गया है। इसके अलावा जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) समेत चार अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी समिति में सदस्य होंगे। शिक्षा विभाग के अनुसार, यह कदम स्थानांतरण प्रक्रिया में तेजी लाने, पारदर्शिता लाने और शिक्षकों की समस्याओं के शीघ्र समाधान के लिए उठाया गया है। अब शिक्षकों को स्थानांतरण के लिए लंबी प्रशासनिक प्रक्रियाओं से नहीं गुजरना पड़ेगा। संबंधित जिले की समिति सीधे उनके प्रस्तावों पर विचार करेगी और आवश्यकतानुसार स्थानांतरण की अनुशंसा करेगी।

पुश नोटिफिकेशन के लिए सब्सक्राइब करें।

शिक्षकों का आरोप है कि नई स्थानांतरण नीति के बाद मन मुताबिक स्थानांतरण को लेकर लूट हो रही है। जिला शिक्षा पदाधिकारी या क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक और निदेशक स्तर के पदाधिकारी मनमाने ढंग से पैसों और पैरवी के बल पर पहले भी स्थानांतरण करते रहे हैं। अब और ये सब बढ़ जाएगा। सरकार ने जो स्थानांतरण नियमावली 2024 का निर्माण किया है, उसमें काफी त्रुटि ही नहीं बल्कि विसंगतियों की भरमार है। इस स्थानांतरण नियमावली में यह स्पष्ट नहीं है यह नियमावली किस प्रकार के शिक्षकों, शिक्षिकाओं के लिए है? शिक्षक जो स्थानांतरण चाहते हैं, उन्हें अनुमंडल स्तर पर स्थानांतर करने की नियमावली के तहत प्रावधान किया गया है, यह भी त्रुटि पूर्ण है। बिहार के कई जिले हैं, जिनमें अनुमंडल एक ही है। ऐसी स्थिति में 10-10 विद्यालयों का विकल्प चुनने को दिया गया है। नई नियमावली की एक कंडिका में प्रावधान किया गया है कि 5 वर्षों में सामूहिक स्थानांतरण भी किया जाएगा यह बिल्कुल निंदनीय है। ऐसी स्थिति में ऐच्छिक स्थानांतरण का क्या औचित्य रह जाता है।

Share This Article