बिहार चुनाव 2025: ये तीन इलाके तय करेंगे एनडीए का भविष्य, पिछली बार महागठबंधन ने किया था कब्जा

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण में एनडीए और महागठबंधन के बीच सियासी जंग पूरी तरह से जोर पकड़ चुकी है। इस बार चुनावी मुकाबला शाहाबाद, मगध और सीमांचल क्षेत्र में निर्णायक साबित हो सकता है, जहां सीटों की संख्या और मतदाता प्रतिशत दोनों महत्वपूर्ण हैं। इन तीन क्षेत्रों में एनडीए को अपनी पिछली हार की भरपाई करने की बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि महागठबंधन ने 2020 में इन इलाकों पर पूरी तरह कब्जा किया था। आइए समझते हैं क्यों ये इलाके इस चुनावी समीकरण में इतने अहम हैं।

शाहाबाद क्षेत्र: एनडीए की नजर नई सीटों पर

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शाहाबाद क्षेत्र में भोजपुर, रोहतास, कैमूर और बक्सर जैसे चार जिलों के विधानसभा क्षेत्र आते हैं। 2020 के चुनाव में एनडीए को यहां जोरदार झटका लगा था। कुल 22 सीटों में से केवल 2 सीटें भोजपुर की बड़हरा और आरा सीट एनडीए के खाते में आई थीं, जबकि बाकी 20 सीटों पर महागठबंधन का कब्जा था। खासकर कैमूर, रोहतास और बक्सर में एनडीए का खाता भी नहीं खुला था। इस बार एनडीए की रणनीति है कि इन जिलों में कुछ नई सीटें जीतकर अपने नुकसान की भरपाई की जाए।

मगध क्षेत्र: एनडीए का दबदबा बनाने की चुनौती

मगध क्षेत्र में गया, जहानाबाद, अरवल और औरंगाबाद जिले आते हैं, जिनकी कुल 26 सीटों में से 2020 में एनडीए को सिर्फ 5 सीटें मिली थीं। इनमें से गया की चार सीटें एनडीए ने जीती थीं, लेकिन बाकी सीटों पर महागठबंधन का दबदबा रहा। इस बार एनडीए की पूरी कोशिश है कि इन 21 सीटों पर अपनी स्थिति मजबूत कर सके और पिछली हार को कम से कम कर सके।

सीमांचल क्षेत्र: एनडीए के लिए अहम चुनौती

सीमांचल क्षेत्र में पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज जिले आते हैं। यह इलाका हमेशा से चुनावी दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा है। यहां के 20 विधानसभा क्षेत्रों में से 12 सीटों पर एनडीए का कब्जा है, लेकिन किशनगंज में उसका खाता तक नहीं खुला। इस बार एनडीए सीमांचल में विकास और घुसपैठ जैसे मुद्दों पर जोर देती हुई दिखाई दे रही है, ताकि यहां के मतदाताओं को अपने पक्ष में किया जा सके।

एनडीए के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं ये तीन इलाके

कुल मिलाकर, शाहाबाद, मगध और सीमांचल की लड़ाई इस बार एनडीए के लिए निर्णायक साबित हो सकती है। यदि एनडीए इन तीन इलाकों में अच्छी सीटें जीतने में कामयाब रहती है, तो सत्ता तक पहुंचने की उसकी राह मजबूत हो सकती है। एनडीए के लिए इन क्षेत्रों की जीत, उसकी चुनावी रणनीति और राज्य में वापसी के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगी।

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