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बिहार में जमीन से जुड़े सरकारी दस्तावेजों और राजस्व अभिलेखों में जाति के नामकरण को लेकर चल रहा संशय अब खत्म हो गया है। उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी दस्तावेजों से ‘भूमिहार-ब्राह्मण’ का नाम नहीं हटाया जाएगा। विधानसभा के बजट सत्र के दौरान इस संवेदनशील मुद्दे पर सरकार की ओर से आधिकारिक रुख स्पष्ट करते हुए मंत्री ने आदेश जारी कर दिया है कि अभिलेखों में जाति के कॉलम के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी।
बजट सत्र में गूंजा जाति का मुद्दा
बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान अतरी विधायक रोमित कुमार ने इस मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाया। उन्होंने सदन को ध्यान दिलाया कि 1931 की जनगणना में ‘भूमिहार-ब्राह्मण’ की आबादी करीब नौ लाख दर्ज थी। हालांकि, 2023 में राज्य सरकार द्वारा कराई गई जातीय गणना की 215 जातियों की सूची में इस नाम को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी।
विधायक के सवाल का जवाब देते हुए विजय सिन्हा ने घोषणा की कि राजस्व विभाग के पुराने और नए सभी डिजिटल अभिलेखों में ‘भूमिहार-ब्राह्मण’ शब्द पहले की तरह ही बरकरार रहेगा। उन्होंने आश्वस्त किया कि विभाग ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगा जिससे ऐतिहासिक पहचान या जातिगत नामकरण में कोई विसंगति आए।
अवैध कब्जे पर कड़ा रुख: “मेरी दवा कड़वी, पर असरदार”
सदन में चर्चा के दौरान आरजेडी विधायक राहुल कुमार ने जमीन पर अवैध कब्जे का मुद्दा उठाया। इस पर विजय सिन्हा ने अपने चिर-परिचित अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा, “मेरी दवा थोड़ी कड़वी जरूर होती है, लेकिन उसका असर गहरा होता है।” उन्होंने साफ किया कि वे एक विशेष मिशन पर काम कर रहे हैं और जब तक वे इस विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, भू-माफियाओं के खिलाफ ठोस परिणाम निकलेंगे।
भ्रष्टाचार पर नकेल: सभी 537 अंचलों में लगेंगे CCTV
राजस्व विभाग में पारदर्शिता लाने और अंचल कार्यालयों में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने के उद्देश्य से सरकार ने एक बड़ी योजना तैयार की है, जिसके तहत राज्य के सभी 537 अंचल कार्यालयों की सुरक्षा और जवाबदेही पुख्ता करने के लिए 6.71 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है। इस पहल के अंतर्गत प्रत्येक अंचल को 1.25 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं ताकि वहां सीसीटीवी कैमरे लगाए जा सकें, जिससे न केवल प्रशासनिक कामकाज में पारदर्शिता आएगी बल्कि बिचौलियों के दखल पर भी प्रभावी रोक लगने की उम्मीद है।
सरकार के इस फैसले से जहाँ एक ओर ‘भूमिहार-ब्राह्मण’ समाज की पहचान से जुड़े विवाद पर विराम लगा है, वहीं अंचल कार्यालयों के डिजिटलीकरण और निगरानी के फैसले से आम जनता को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। अब देखना यह है कि सीसीटीवी कैमरों की निगरानी से जमीन संबंधी विवादों के निपटारे में कितनी तेजी आती है।