2025 में एक तरफ बंगाल की खाड़ी को चीरता चक्रवात मोंथा, दूसरी तरफ अटलांटिक को थर्राता हरिकेन मेलिसा- दोनों शक्तिशाली बवंडर तेज हवाओं, मूसलाधार बारिश और बाढ़ की तबाही मचा रहे हैं। लेकिन इनकी ताकत महज डर या अंदाजे की बात नहीं बल्कि वैज्ञानिक पैमानों से तय होती है। ‘क्लास’, बताती है कि तूफान हल्की फुहार बरसाएगा या शहर डुबो देगा। आइए समझें, कैसे मापी जाती है।
दुनिया भर में समुद्री तूफानों की विनाशकारी शक्ति को वैज्ञानिक रूप से मापने के लिए दो प्रमुख पैमाने प्रचलित हैं-सैफिर-सिम्पसन हरिकेन विंड स्केल (Saffir-Simpson Hurricane Wind Scale) और वेरिकेल स्केल (V-Scale)। ये पैमाने न केवल हवाओं की गति को आधार बनाते हैं, बल्कि उनसे होने वाले संभावित नुकसान का भी पूर्वानुमान लगाते हैं, जिससे बचाव और तैयारी में मदद मिलती है।
सैफिर-सिम्पसन स्केल: अटलांटिक और कैरिबियन का मापदंड
अमेरिका, कैरिबियन और अटलांटिक महासागर के क्षेत्रों में हरिकेन की तीव्रता निर्धारित करने के लिए सैफिर-सिम्पसन स्केल का उपयोग होता है। यह स्केल 1970 के दशक में विकसित किया गया था। और मुख्य रूप से तूफान की अधिकतम निरंतर हवा की गति पर आधारित है। इसे 1 से 5 तक की पांच श्रेणियों में विभाजित किया गया है:
कैटेगरी 1: हवाओं की गति 119–153 किमी/घंटा। यह स्तर अपेक्षाकृत हल्का होता है, जहां पेड़ों की टहनियां टूट सकती हैं, बिजली की लाइनें प्रभावित हो सकती हैं, लेकिन संरचनात्मक नुकसान सीमित रहता है।
कैटेगरी 2: 154–177 किमी/घंटा। यहां छतें उड़ने, पेड़ उखड़ने और बिजली-पानी की आपूर्ति में लंबे व्यवधान की आशंका बढ़ जाती है। तटीय इलाकों में मध्यम बाढ़ संभव।
कैटेगरी 3: 178–208 किमी/घंटा। इसे ‘मेजर हरिकेन’ कहा जाता है, जहां गंभीर नुकसान शुरू होता है—घरों की छतें ढह सकती हैं, बिजली के खंभे गिर सकते हैं और निचले इलाकों में व्यापक बाढ़ आ सकती है।
कैटेगरी 4: 209–251 किमी/घंटा। विनाशकारी स्तर; दीवारें गिरना, छतें पूरी तरह उड़ जाना और बड़े क्षेत्रों में बाढ़ आम बात। पुनर्वास में महीनों लग सकते हैं।
कैटेगरी 5: 252 किमी/घंटा से ऊपर। पूर्ण तबाही—अधिकांश इमारतें ध्वस्त, बिजली-पानी वर्षों तक प्रभावित, और बड़े पैमाने पर जनहानि की संभावना।
यह स्केल केवल हवा की गति ही नहीं मापता, बल्कि संपत्ति को होने वाले नुकसान, बाढ़ की ऊंचाई और बचाव की जरूरतों का भी आकलन करता है। उदाहरण के लिए, 2025 का हरिकेन मेलिसा यदि कैटेगरी 4 में है, तो यह तटीय अमेरिकी राज्यों में भयावह स्थिति पैदा कर सकता है।
वेरिकेल स्केल: भारतीय उपमहाद्वीप के लिए अनुकूलित
भारत में बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में आने वाले चक्रवातों की तीव्रता मापने के लिए भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) वेरिकेल स्केल का उपयोग करता है। यह स्केल भी सैफिर-सिम्पसन से प्रेरित है, लेकिन स्थानीय समुद्री और जलवायु परिस्थितियों- जैसे उष्णकटिबंधीय जल की गर्माहट, मानसून का प्रभाव और घनी आबादी वाले तटीय क्षेत्रों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसे V1 से V5 तक की श्रेणियों में बांटा गया है:
V1: सबसे कम तीव्रता, हवाएं 62–88 किमी/घंटा। हल्की बारिश और मामूली नुकसान।
V2: 89–117 किमी/घंटा। मध्यम स्तर; पेड़ गिरना, छतों को क्षति।
V3: 118–165 किमी/घंटा। गंभीर चक्रवात; संरचनात्मक नुकसान और बाढ़।
V4: 166–221 किमी/घंटा। अत्यधिक गंभीर; बड़े पैमाने पर तबाही।
V5: 222 किमी/घंटा से ऊपर। सुपर साइक्लोन; पूर्ण विनाश, जैसे 1999 का ओडिशा सुपर साइक्लोन।
दरअसल, वेरिकेल स्केल को अपनाने का मुख्य कारण यह है कि भारतीय महासागरों में तूफान पश्चिमी क्षेत्रों से अलग करते हैं। यहां गर्म समुद्री सतह और निम्न दाब क्षेत्र तेजी से ऊर्जा प्रदान करते हैं, जिससे तूफान जल्दी मजबूत हो जाते हैं। 2025 का चक्रवात मोंथा यदि V4 या V5 में पहुंचता है, तो पूर्वी तट—ओडिशा, आंध्र प्रदेश या पश्चिम बंगाल में भारी तबाही मचा सकती है।