लालू यादव की चादरपोशी से गरमाई बिहार की सियासत, जदयू-भाजपा ने लगाया ‘तुष्टिकरण’ का आरोप

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। इसी क्रम में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने पटना स्थित हाईकोर्ट दरगाह पहुंचकर चादरपोशी की, जिसके बाद बिहार की राजनीति में एक नई बहस छिड़ गई है। दरगाह के उर्स मुबारक के मौके पर लालू यादव अपने परिवार और करीबी नेताओं के साथ पहुंचे और राज्य की शांति, भाईचारे और तरक्की के लिए दुआएं मांगी।

लालू यादव ने खुद भी इस घटना की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करते हुए लिखा कि उन्होंने “प्रदेश में लोगों के बीच मेल-जोल, प्रेम, शांति, तरक्की और सद्भाव” के लिए दुआ मांगी है।

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जदयू-भाजपा का ‘तुष्टिकरण’ का आरोप
लालू यादव का यह कदम विपक्षी दलों, खासकर जनता दल यूनाइटेड (जदयू) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को रास नहीं आया। दोनों पार्टियों ने इसे तुष्टिकरण की राजनीति करार दिया।

जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने लालू यादव पर तंज कसते हुए कहा, “चादरपोशी करने का हक सबको है, लेकिन लालू प्रसाद यादव किस मन्नत के लिए गए थे, यह बड़ा सवाल है।” उन्होंने आरोप लगाया कि लालू यादव ऊपर से तो समाज की बात करते हैं, लेकिन उनकी असली मन्नत यह है कि उनके बेटे तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री का उम्मीदवार घोषित कर दिया जाए। नीरज कुमार ने यह भी याद दिलाया कि जो लालू यादव कभी धार्मिक आयोजनों का विरोध करते थे, वही आज बदलती राजनीतिक हवा को देखते हुए मंदिरों और दरगाहों में नजर आ रहे हैं। उन्होंने हाल ही में लालू के गया जाकर पिंडदान करने का भी जिक्र किया, लेकिन कहा कि इन सब से उन्हें कोई राजनीतिक फायदा नहीं होने वाला।

वहीं, भाजपा ने भी लालू यादव पर हमला बोलते हुए कहा कि उनका हर कदम केवल चुनावी नफे-नुकसान के हिसाब से होता है। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि वे लोगों की धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल केवल वोट बैंक के लिए करना चाहते हैं। भाजपा का कहना है कि लालू का यह कदम साफ तौर पर तुष्टिकरण की राजनीति है।

राजद का बचाव और आगामी चुनाव में धर्म की भूमिका
लालू यादव के इस कदम का राजद समर्थकों ने बचाव किया है। उनके मुताबिक, लालू यादव हमेशा से ही सभी धर्मों और समुदायों के बीच भाईचारे की बात करते रहे हैं, और दरगाह पर जाकर दुआ करना उनकी आस्था और परंपरा का हिस्सा है, न कि राजनीति का।

यह घटना दर्शाती है कि आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में धर्म और आस्था भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनने जा रहे हैं। जहां एक तरफ लालू यादव अपनी छवि को समावेशी और सर्वधर्म समभाव वाली बनाना चाहते हैं, वहीं विपक्षी दल इसे उनके चुनावी रणनीति का हिस्सा बता रहे हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता इन कदमों को किस तरह से लेती है।

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