सिटी पोस्ट लाइव
बिहार की नीतीश कुमार सरकार ने अपने मंत्रियों को विभागों का बंटवारा कर दिया है, और इस बार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गृह मंत्रालय अपने पास रखने की बजाय, बीजेपी नेता सम्राट चौधरी को सौंपा है। हालांकि, सबसे महत्वपूर्ण यह है कि बिहार सरकार का सबसे बड़ा बजट वाला मंत्रालय अब भी जदयू के पास है।
नीतीश कुमार के नेतृत्व में राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए लगभग 3 लाख 16 हजार करोड़ रुपये का बजट पेश किया था। इस बजट का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा विभाग को आवंटित किया गया है। यदि मंत्रालयों का बजट देखा जाए तो जदयू के पास कुल 3 विभागों का बजट सबसे ज्यादा है।
सबसे ज्यादा बजट वाला विभाग शिक्षा मंत्रालय
जदयू के सुनील कुमार को बिहार सरकार में शिक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और तकनीकी शिक्षा विभाग का जिम्मा सौंपा गया है। इस विभाग का कुल बजट 60 हजार करोड़ रुपये है। सुनील कुमार, जो कि गोपालगंज के अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित भोरे विधानसभा सीट से विधायक हैं, ने 2024 में शिक्षा मंत्री बनने के बाद पहली बार इस विभाग की जिम्मेदारी संभाली थी। इस बार भी उन्हें यह विभाग सौंपा गया है।
स्वास्थ्य विभाग – 20 हजार करोड़
स्वास्थ्य मंत्रालय का जिम्मा बीजेपी के मंगल पांडे को सौंपा गया है। स्वास्थ्य विभाग का बजट 20 हजार करोड़ रुपये रखा गया है। इसके अलावा, मंगल पांडे को विधि विभाग भी सौंपा गया है, जिससे उनके पास कुल 21 हजार करोड़ रुपये का बजट होगा।
गृह मंत्रालय – 17 हजार करोड़
सम्राट चौधरी, जो कि बिहार के उपमुख्यमंत्री भी हैं, को गृह मंत्रालय सौंपा गया है। गृह मंत्रालय का बजट 17 हजार करोड़ रुपये है।
ग्रामीण विकास विभाग – 16 हजार करोड़
श्रवण कुमार को जदयू द्वारा ग्रामीण विकास और परिवहन विभाग का जिम्मा सौंपा गया है। इस विभाग का बजट 16 हजार करोड़ रुपये रखा गया है।
ऊर्जा विभाग – 13 हजार करोड़
बिजेंद्र प्रसाद यादव को ऊर्जा विभाग का जिम्मा सौंपा गया है। इसके अलावा उन्हें वित्त, योजना एवं विकास, वाणिज्य कर और मद्य निषेध विभागों की जिम्मेदारी भी दी गई है। ऊर्जा विभाग का बजट 13 हजार करोड़ रुपये है, जबकि उनके पास कुल 19 हजार करोड़ रुपये का बजट होगा।
इन पांच मंत्रियों के पास बिहार के बजट का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा रहेगा, जो राज्य के विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।कुल मिलाकर, राज्य के 3.16 लाख करोड़ रुपये के पिछले बजट में से 1.35 लाख करोड़ रुपये से अधिक का बजट इन पांच मंत्रियों के पास रहेगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी की संख्या बल में मजबूती के बावजूद, जेडीयू के मंत्रियों ने राज्य के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण वित्तीय मंत्रालयों पर अपना कब्जा बनाए रखा है। नई सरकार के पहले बजट में इन मंत्रालयों को कितना आवंटन मिलता है, इस पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।