बीजेपी अध्यक्ष चुनाव: नितिन नबीन निर्विरोध बने सत्ताधारी पार्टी के नए अध्यक्ष, जेपी नड्डा की जगह ली

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के संगठनात्मक चुनाव में आज एक बड़ा ऐतिहासिक पड़ाव आया। बिहार के कद्दावर नेता और वर्तमान कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन को सर्वसम्मति से भाजपा का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया गया है। इस पद के लिए उनके पक्ष में 37 सेट नामांकन पत्र दाखिल किए गए थे, जबकि उनके खिलाफ किसी भी अन्य उम्मीदवार ने पर्चा नहीं भरा। इसके साथ ही नितिन नवीन का निर्विरोध चुना जाना तय हो गया, जो भाजपा के भीतर उनके प्रति व्यापक समर्थन और विश्वास को दर्शाता है।

वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में हुआ नामांकन
नितिन नवीन के नामांकन की प्रक्रिया में पार्टी की एकजुटता और भव्यता देखते ही बनी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चुनाव अधिकारी के. लक्ष्मण को नितिन नवीन के नामांकन पत्र सौंपे। इस अवसर पर गृह मंत्री अमित शाह, नितिन गडकरी, धर्मेंद्र प्रधान और भूपेंद्र यादव जैसे दिग्गज नेता उपस्थित थे। इसके बाद अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू और बिहार, महाराष्ट्र, असम समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों और प्रतिनिधियों ने भी उनके समर्थन में नामांकन पत्र दाखिल किए।

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कौन हैं नितिन नवीन?
45 वर्षीय नितिन नवीन भाजपा के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्षों में से एक बन गए हैं। वे पटना के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र से पांच बार के विधायक हैं और बिहार की राजनीति का एक जाना-माना चेहरा हैं।

• राजनीतिक विरासत: वे दिवंगत भाजपा नेता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा के पुत्र हैं। पिता के निधन के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और अपनी मेहनत से संगठन में अलग पहचान बनाई।

• संगठनात्मक अनुभव: नितिन नवीन बिहार सरकार में पथ निर्माण और नगर विकास जैसे महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री रह चुके हैं। इसके अलावा, उन्होंने छत्तीसगढ़ के प्रभारी के रूप में पार्टी को ऐतिहासिक जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी।

• बिहार की राजनीति में स्तंभ: बिहार में जदयू-भाजपा गठबंधन को मजबूत बनाए रखने और हालिया विधानसभा चुनावों में 51,000 से अधिक वोटों से जीत दर्ज करने ने उनके राजनीतिक कद को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया।

नड्डा की लेंगे जगह, युवाओं पर भरोसा
नितिन नवीन अब जेपी नड्डा की जगह लेंगे, जो वर्तमान में मोदी सरकार में स्वास्थ्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। पार्टी के इस फैसले को आगामी विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनावों के मद्देनजर एक ‘जेनरेशनल शिफ्ट’ (पीढ़ीगत बदलाव) के रूप में देखा जा रहा है। आरएसएस और भाजपा आलाकमान का यह दांव युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है।

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