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बिहार विधानसभा उपचुनावों के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपने उम्मीदवारों की दूसरी सूची बुधवार को जारी कर दी, जिसमें एक चौंकाने वाला नाम पूर्व आईपीएस अधिकारी आनंद मिश्रा का भी शामिल है। बीजेपी ने उन्हें ब्राह्मण बहुल और प्रभाव वाली बक्सर विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब बीजेपी 2010 के बाद से इस महत्वपूर्ण सीट पर जीत का स्वाद नहीं चख पाई है, और लगातार दो बार से कांग्रेस के संजय कुमार तिवारी ‘मुन्ना तिवारी’ यहां से जीतते आ रहे हैं।
आनंद मिश्रा, भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के 2011 बैच के असम कैडर के अधिकारी रहे हैं, जिन्होंने 2024 में नौकरी से इस्तीफा देकर राजनीति में प्रवेश किया था। उन्होंने इसी साल बक्सर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। राजनीति में आने के लिए नौकरी छोड़ने के बावजूद, लोकसभा चुनाव में बीजेपी का टिकट न मिलने पर वह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे थे। लोकसभा चुनाव में 47 हजार से अधिक वोट पाकर वे चौथे स्थान पर रहे थे, जहां राष्ट्रीय जनता दल के सुधाकर सिंह ने बीजेपी के मिथिलेश तिवारी को हराया था।
लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद मिश्रा प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी में शामिल हो गए थे। लेकिन इस साल अगस्त में ही उन्होंने जन सुराज छोड़कर बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर ली। बीजेपी में शामिल होते वक्त उन्होंने कहा था कि वे आजीवन बीजेपी में ही रहेंगे और चुनाव लड़ने नहीं, बल्कि “बेहतर बक्सर और बेहतर बिहार” बनाने आए हैं।
बीजेपी का यह दांव बक्सर की पृष्ठभूमि में खास मायने रखता है। 2020 के पिछले विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी ने एक बड़ा प्रयोग किया था। उस समय बिहार पुलिस के पूर्व महानिदेशक (डीजीपी) गुप्तेश्वर पांडे टिकट की रेस में थे, लेकिन बीजेपी ने पूर्व डीजीपी की जगह बिहार पुलिस के ही एक पूर्व कांस्टेबल परशुराम चौबे पर भरोसा जताया था। हालांकि, परशुराम चौबे करीब चार हजार वोट के मामूली अंतर से कांग्रेस के संजय कुमार तिवारी से चुनाव हार गए थे। चौबे को 55,525 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार को 59,417 वोट प्राप्त हुए थे।
बक्सर विधानसभा सीट एक ब्राह्मणों की बहुलता वाली सीट मानी जाती है। बीजेपी ने आखिरी बार 2010 में इस सीट पर जीत दर्ज की थी, जब सुखदा पांडेय विजयी हुई थीं। 2015 और 2020 में कांग्रेस के संजय कुमार तिवारी लगातार जीत रहे हैं। ऐसे में, बीजेपी ने एक नया, चर्चित और युवा चेहरा आनंद मिश्रा को उतारकर कांग्रेस के किले को भेदने की तैयारी की है।
बीजेपी में शामिल होने के समय प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने यह संकेत दिया था कि आनंद मिश्रा को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जाएगी और उन्हें केवल एक जिले तक सीमित न रखकर पूरे बिहार के काम में लगाया जाएगा। अब, विधानसभा उपचुनाव में उन्हें टिकट देकर पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह मिश्रा के नए चेहरे और उनकी अपील का उपयोग करके 2010 से चला आ रहा हार का सूखा खत्म करना चाहती है। देखना होगा कि पूर्व आईपीएस अधिकारी आनंद मिश्रा, क्या पूर्व कांस्टेबल परशुराम चौबे की हार की भरपाई कर पाएंगे और बक्सर में बीजेपी के लिए जीत का परचम लहरा पाएंगे।