सिटी पोस्ट लाइव
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ऐतिहासिक गोलघर के कायाकल्प को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि गोलघर वास्तुकला का एक अद्भुत नमूना है, और इसके संरचनात्मक रख-रखाव में विशेष ध्यान रखा जाएगा ताकि इसे और बेहतर तरीके से संरक्षित किया जा सके। मुख्यमंत्री ने रविवार को गोलघर परिसर का निरीक्षण किया और इसकी मौजूदा स्थिति का जायजा लिया।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने गोलघर परिसर के सौंदर्यीकरण, संरचनात्मक स्थिति, लाइट एंड साउंड और लेजर शो के संचालन पर भी ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि गोलघर की देखरेख और संरचना को बेहतर तरीके से बनाए रखा जाए ताकि यह पर्यटकों के लिए और भी आकर्षक बने। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोलघर एक ऐतिहासिक धरोहर है, और इसकी ऐतिहासिक महत्ता को देखते हुए यहां आने वाले लोगों को इतिहास के बारे में जानकारी देने के लिए डिस्प्ले बोर्ड लगाए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि गोलघर परिसर में लाइट एंड साउंड तथा लेजर शो का नियमित रूप से संचालन किया जाए, ताकि लोग इसके ऐतिहासिक महत्व के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें। साथ ही, गोलघर की सुंदरता और संरचनात्मक अद्वितीयता को बनाए रखने के लिए सौंदर्यीकरण और रखरखाव कार्यों को गति दी जाएगी।
गोलघर की ऐतिहासिक महत्ता और पर्यटन के दृष्टिकोण से यह पटना का प्रमुख स्थल बन चुका है। इसका निर्माण 1786 में अंग्रेजी शासनकाल के दौरान गवर्नर जनरल वॉरेन हेस्टिंग्स के आदेश पर हुआ था, जो अकाल की स्थिति से निपटने के लिए अनाज भंडारण के उद्देश्य से बनाया गया था। गोलघर की विशेषता इसकी अद्वितीय वास्तुकला है, जिसमें 145 सीढ़ियों के साथ 29 मीटर ऊंची संरचना है, जिससे ऊपर से गंगा नदी और पटना शहर का मनमोहक दृश्य दिखाई देता है।
आज गोलघर सिर्फ एक ऐतिहासिक इमारत नहीं, बल्कि पटना का एक प्रमुख पर्यटन स्थल बन चुका है। राज्य सरकार इसके और विकास के लिए समय-समय पर योजनाओं को लागू कर रही है, ताकि यह और भी आकर्षक और सुविधाजनक बन सके।