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बिहार विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में नई सरकार का गठन हो चुका है। गुरुवार को राजधानी पटना के गांधी मैदान में हुए शपथ ग्रहण समारोह में सीएम नीतीश कुमार के साथ कई प्रमुख मंत्रियों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली, जिनमें सबसे प्रमुख नामों में से एक विजय कुमार चौधरी का है। एक पूर्व बैंकर से लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सबसे करीबी मंत्री बनने तक का उनका राजनीतिक सफर बेहद रोचक और प्रभावशाली रहा है।
समस्तीपुर जिले के सरायरंजन विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले विजय कुमार चौधरी जदयू के वरिष्ठ नेताओं में शुमार हैं। उनकी पहचान न केवल एक अनुभवी राजनेता के रूप में है, बल्कि वे एक राजनीतिक विरासत को भी आगे बढ़ा रहे हैं। उनके पिता, स्वर्गीय जगदीश प्रसाद चौधरी, एक स्वतंत्रता सेनानी थे और कांग्रेस पार्टी से विधायक भी रहे थे। यही वजह रही कि विजय कुमार चौधरी ने भी अपने राजनीतिक जीवन का आगाज़ कांग्रेस पार्टी से ही किया था। बाद में, 2005 में उन्होंने जनता दल यूनाइटेड (JDU) का दामन थाम लिया और संगठन में कई महत्वपूर्ण भूमिकाओं का सफलतापूर्वक निर्वहन किया।
शिक्षा और बैंकिंग से राजनीति तक का सफर
विजय कुमार चौधरी ने अपनी शिक्षा पटना यूनिवर्सिटी से पूरी की, जहाँ से उन्होंने इतिहास में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त की। शिक्षा पूरी करने के बाद, उन्होंने अपने करियर की शुरुआत देश के सबसे बड़े बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (SBI), के साथ एक बैंकर के रूप में की।
उनका बैंकिंग करियर 1982 तक ही चला। पिता के निधन के बाद, उन्होंने उनकी राजनीतिक विरासत को संभालने का फैसला किया। इस महत्वपूर्ण मोड़ पर उन्होंने बैंक की नौकरी छोड़कर सक्रिय राजनीति में कदम रखा। उन्होंने 1982 में दलसिंहसराय विधानसभा सीट से उपचुनाव लड़ा और जीत हासिल कर पहली बार विधायक बने।
राजनीतिक उपलब्धियाँ और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ
विजय कुमार चौधरी ने 1982, 1985 और 1990 में दलसिंहसराय का प्रतिनिधित्व किया। 2005 में जदयू में शामिल होने के बाद, उन्होंने 2010 में पहली बार सरायरंजन सीट से जीत दर्ज की और तब से वह लगातार इस सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
उनके लंबे राजनीतिक करियर में उन्होंने कई महत्वपूर्ण और उच्च पदों की जिम्मेदारी संभाली है:
• जल संसाधन मंत्री: 2010 से 2015 तक और 2015 में संक्षिप्त अवधि के लिए इस महत्वपूर्ण विभाग का कार्यभार संभाला।
• बिहार विधान सभा के अध्यक्ष: 2015 से 2020 तक उन्होंने 15वें बिहार विधान सभा के अध्यक्ष के रूप में संवैधानिक पद की गरिमा बढ़ाई।
• शिक्षा मंत्री: फरवरी 2021 से अगस्त 2022 तक शिक्षा और संसदीय मामलों के मंत्री रहे।
• वित्त और वाणिज्यिक कर मंत्री: अगस्त 2022 से जनवरी 2024 तक उन्होंने राज्य के वित्त जैसे महत्वपूर्ण विभाग को संभाला।
• संसदीय कार्य मंत्री: वे लगभग अपनी हर मंत्री पारी में संसदीय मामलों के मंत्री पद पर आसीन रहे हैं, जो उनकी संगठनात्मक क्षमता और सदन के नियमों की गहरी समझ को दर्शाता है।
• हालिया जिम्मेदारी: 16 मार्च 2024 को, उन्हें फिर से जल संसाधन और संसदीय कार्यमंत्री की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अपने अनुभव, संगठनात्मक कौशल और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ घनिष्ठ संबंध के कारण, विजय कुमार चौधरी वर्तमान बिहार मंत्रिमंडल के सबसे प्रभावशाली और विश्वसनीय सदस्यों में से एक बने हुए हैं।