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पटना: बिहार में लोगों को फिलहाल ठंड से कोई राहत मिलने की उम्माद नहीं है। आज बिहार राज्य के 26 जिलों में कोल्ड डे के लिए यलो अलर्ट जारी किया गया है। पटना सहित कई अन्य जिलों में रविवार को न्यूनतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट हो सकती है। हालांकि, आज सुबह से पटना में धूप निकली हुई है, जो थोड़ी राहत दे रही है। मौसम विभाग के अनुसार, पाकिस्तान में बने पश्चिमी विक्षोभ का असर अगले कुछ दिनों में बिहार में दिखाई दे सकता है। शुक्रवार को रोहतास जिले में सबसे अधिक ठंड रिकॉर्ड की गई, जहां न्यूनतम तापमान 8.6 डिग्री सेल्सियस रहा।
कोहरे के कारण ट्रेनों की देरी
कोहरे की वजह से ट्रेनों की रफ्तार पर असर पड़ा है। पटना जंक्शन पर आने वाली 3 ट्रेनें आज लेट हैं।
- साउथ बिहार एक्सप्रेस (13287) अपने निर्धारित समय से 3:39 घंटे देरी से पहुंचेगी। यह ट्रेन अब सुबह 10:19 बजे पटना जंक्शन पर पहुंचेगी।
- आनंद बिहार भागलपुर गरीब रथ एक्सप्रेस (22406) 5:29 घंटे लेट है और अब यह सुबह 11:14 बजे तक पहुंचेगी।
- नई दिल्ली इस्लामपुर मगध एक्सप्रेस (20802) 3:26 घंटे की देरी से पटना जंक्शन पर शाम 4 बजे पहुंचेगी।
बता दें बिहार में ठंड के चलते प्रदूषण स्तर भी काफी बढ़ गया है। शनिवार को हाजीपुर की हवा सबसे खराब रही, जहां का AQI 290 दर्ज किया गया। वहीं, सीवान जिले में अधिकतम तापमान 23.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो बिहार के अन्य हिस्सों से अधिक था। मौसम विभाग ने 10 जिलों के तापमान के आंकड़े जारी किए हैं।
पटना मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के अनुसार, इस समय पश्चिमी विक्षोभ का असर बिहार में महसूस हो रहा है, जिससे पछुआ हवा तेज़ी से चल रही है। इस कारण ठंडी और बर्फीली हवा का प्रभाव बढ़ गया है। इसके चलते पटना के अलावा गोपालगंज और मुंगेर में भी 18 जनवरी तक आठवीं क्लास तक के स्कूलों को बंद कर दिया गया है।
ठंड के कारण खासकर बच्चों और बुजुर्गों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ गई हैं। बच्चों में वायरल इंफेक्शन के कारण निमोनिया, कोल्ड डायरिया, सर्दी-खांसी, बुखार और ब्रोंकियोलाइटिस जैसी समस्याएं देखी जा रही हैं। 1 साल से कम उम्र के बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। पीएमसीएच के शिशु रोग विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष के अनुसार, “प्रदूषण की वजह से बच्चों में सांस लेने में कठिनाई हो रही है। इसके कारण कई बच्चे दूध नहीं पी पा रहे और उन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ रहा है। ओपीडी में आने वाले बच्चों में से 25% को सांस लेने में परेशानी है। उचित इलाज के बाद बच्चे 4-5 दिनों में ठीक हो रहे हैं।”