बिहार में भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी: सरकारी योजनाओं में कटौती कर जेब भर रहे अधिकारी, निगरानी विभाग की कार्रवाई में BDO और लेखापाल गिरफ्तार

अररिया रानीगंज में रिश्वत लेते पकड़े गए अफसर, 15 लाख की योजना में 10% कमीशन की मांग

Deepak Sharma

“बिहार में विकास नहीं, कमीशन चलता है – योजना पास करानी हो तो 10% ‘सेवा शुल्क’ तय!”

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार में सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता एक बार फिर सवालों के घेरे में है। अररिया जिले के रानीगंज प्रखंड में प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) रितम कुमार और उनके लेखापाल आदित्य प्रियदर्शी को निगरानी विभाग ने रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई मंगलवार देर रात पटना से आई निगरानी टीम द्वारा की गई, जिसका नेतृत्व डीएसपी चंद्रभूषण कुमार कर रहे थे। टीम ने बीडीओ के आवास पर छापा मारा और 1.5 लाख रुपये रिश्वत लेते हुए दोनों अफसरों को धर दबोचा।

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क्या है मामला?

रानीगंज के उप प्रमुख कलानंद सिंह और उनके सहयोगी शंभू यादव ने निगरानी विभाग को सूचित किया था कि एक 15 लाख रुपये की सरकारी योजना में स्वीकृति दिलाने के लिए 10% यानी 1.5 लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई है।
सूचना की पुष्टि के बाद, निगरानी विभाग ने जाल बिछाया और आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ लिया।

भ्रष्टाचार ने रोका बिहार का विकास

यह कोई पहला मामला नहीं है। बिहार में प्रखंड स्तर से लेकर उच्च पदों तक भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि योजनाएं कागज़ पर बनती हैं और उनके पैसे अधिकारी व ठेकेदार आपस में बाँट लेते हैं। सरकारी योजनाओं के लिए जो पैसा 12 करोड़ बिहारवासियों द्वारा टैक्स के रूप में दिया जाता है, उसे भ्रष्ट अधिकारी “कमीशन” के नाम पर लूट लेते हैं। यही वजह है कि आज भी बिहार में पुल चालू होने से पहले गिर जाते हैं, सड़कें कुछ ही महीनों में टूटने लगती हैं और ग्रामीण क्षेत्रों का विकास अधूरा रह जाता है।

भ्रष्टाचार के इस चलन ने बिहार की छवि और बुनियादी विकास को भारी नुकसान पहुंचाया है। जब योजनाओं से 10% कमीशन पहले ही काट लिया जाए, तो गुणवत्तापूर्ण काम की उम्मीद कैसे की जा सकती है?

निगरानी विभाग ने बीडीओ (प्रखंड विकाश पदाधिकारी ) और लेखापाल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में पूछताछ के दौरान और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं। इस कार्रवाई ने संकेत दिया है कि सरकार की निगरानी एजेंसियां सक्रिय हैं, लेकिन जरूरत है नियमित और कठोर जांच की, ताकि ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों को समय पर रोका जा सके।

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