सिटी पोस्ट लाइव : कांग्रेस ने ऐसा माहौल बनाया लगा जैसे वो अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है. तेजस्वी यादव को आखिरकार कांग्रेस की शरण में जाना पड़ा.दिल्ली में तेजस्वी यादव की राहुल गांधी के साथ बैठक तो हो गई लेकिन सीटों के बटवारे को लेकर सहमति नहीं बन पाई.सीटों की संख्या को लेकर पेंच फंसा हुआ है.कांग्रेस 70 सीटों की मांग पर अदि है जबकि तेजस्वी यादव 50 से ज्यादा सीट देने की स्थिति में नहीं हैं.
सूत्रों के अनुसार -70 सीटों का पेंच और मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर अभीतक सहमति नहीं बन पाई है. कांग्रेस को आरजेडी 50 सीट से ज्यादा देने के मूड में नहीं है और कांग्रेस इससे कम सीट पर समझौता के लिए तैयार नहीं है.कांग्रेस दो उपमुख्यमंत्री अपना बनाना चाहती है.मामला यही फंस गया है.आज 17 अप्रैल को पटना में महागठबंधन की बैठक बुलाई गई है. हालांकि पार्टी सूत्रों का दावा है कि दोनों मुद्दों पर कुछ आगे-पीछे होकर समाधान निकाला जाएगा और इसके लिए बैठकों का दौर शुरू हो चुका है.
पहले दिल्ली में तेजस्वी यादव की मल्लिकार्जुन खडगे और राहुल गांधी के साथ बैठक हुई लेकिन कोई हल नहीं निकल पाया. ऐसे में एक बार फिर से 17 तारीख़ को पटना में महागठबंधन की बैठक बुलाई गई है. इस बैठक में आरजेडी, कांग्रेस, लेफ्ट के तीनों दल और VIP पार्टी के नेता शामिल होंगे और सीटों के पेंच के साथ मुख्यमंत्री का चेहरा कौन होगा उसको सुलझाने की कोशिश होगी.
राजनीति के जानकारों का मानना है कि बिहार में आरजेडी अपना अपर हैंड रखने और ज्यादा से ज्यादा सीटों पर खुद चुनाव लड़ने की तैयारी कर चुकी है. अपने उम्मीदवारों को ग्रीन सिग्नल देने और चुनाव की तैयारी करने को कहा जा चुका है. बीते चुनावों में भी यह देखा जा चुका है कि दोनों पार्टियों के बीच रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं. इसबार भी जातिगत वोट बैंक को लेकर आरजेडी और कांग्रेस के बीच रार जारी है.