बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों पर मंथन के लिए आरजेडी की अहम समीक्षा बैठक सोमवार को पटना में हुई, जहां तेजस्वी यादव को दोबारा विधायक दल का नेता और नेता प्रतिपक्ष चुना गया। बैठक में लालू प्रसाद, राबड़ी देवी और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी के बीच माहौल सामान्य दिख रहा था, लेकिन समीक्षा के बाद पूर्व प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह के एक विस्फोटक बयान ने सियासी तापमान अचानक बढ़ा दिया।
जगदानंद सिंह ने मीडिया से बातचीत में चुनाव नतीजों पर गहरी नाराजगी जताते हुए दावा किया कि हर ईवीएम में करीब 25 हजार वोट पहले से कैद थे। साथ ही कहा कि ऐसी स्थिति की उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी, फिर भी 25 सीटों पर आरजेडी उम्मीदवारों की जीत को उन्होंने “सौभाग्य” बताया। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में छेड़छाड़ की गई और सत्ता पक्ष की ओर से “विशेष उपाय” अपनाए गए। उन्होंने तीखे शब्दों में पूछा कि क्या लोकतंत्र किसी तरह का व्यापार बन गया है, जिसमें धोखाधड़ी चलती रहे? उन्होंने संविधान और मतदाता की नैतिकता की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि ईवीएम में गड़बड़ी अगर साबित होती है, तो यह चुनाव परिणामों को प्रभावित करने वाली बहुत बड़ी समस्या होगी। दरअसल, भाई वीरेंद्र के बयान के बाद आरजेडी का आरोप और भी तीखा हो गया है, जिससे ईवीएम बनाम बैलेट पेपर की पुरानी बहस फिर सामने आ गई है। पार्टी का दावा है कि तकनीकी छेड़छाड़ ने चुनावी परिणामों को प्रभावित किया है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग अपनी स्थिति दोहराते हुए कह चुका है कि ईवीएम पूरी तरह सुरक्षित हैं और किसी भी तरह की हेराफेरी संभव नहीं है।
हालांकि, पार्टी फिलहाल इन आरोपों के आधार पर आगे की रणनीति तय कर रही हैष पार्टी नेताओं का कहना है कि लोकतंत्र की पारदर्शिता के लिए ईवीएम प्रणाली की दोबारा जांच तथा बैलेट पेपर की वापसी पर राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह विवाद बिहार की राजनीति के केंद्र में बना रह सकता है और सियासी टकराव को और तेज कर सकता है।