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भाजपा के इंटरनल सर्वे के मुताबिक, बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव में एनडीए को 42.2% वोट मिलने का अनुमान है, जबकि महागठबंधन को 39.1% वोट मिलने की संभावना है। प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज 5.2% वोट के साथ तीसरे स्थान पर बताई गई है।
हालांकि, सर्वे में जातीय समीकरणों की बात करें तो सवर्ण वोटों में भाजपा को झटका लग सकता है। 10% सवर्ण वोट जनसुराज, जबकि 13% महागठबंधन की ओर झुकते दिख रहे हैं। भाजपा को 66% सवर्ण समर्थन मिलने की उम्मीद है। सितंबर में चुनावी बिगुल बजने की संभावना है, और सभी पार्टियां रणनीति बनाने में जुटी हैं। प्रशांत किशोर की एंट्री से मुकाबला दिलचस्प हो गया है। बिहार में जातिगत समीकरणों के अनुसार वोटिंग रुझान सामने आए हैं। अति पिछड़ा वर्ग का 60% वोट एनडीए के पक्ष में जाने की संभावना है, जबकि महागठबंधन को 19%, जनसुराज को 3% और अन्य को 18% वोट मिल सकते हैं। महादलित वोटों में एनडीए को 40% और महागठबंधन को 38% समर्थन मिलने की संभावना है। वहीं, गैर-यादव पिछड़ा वर्ग में एनडीए को भारी बढ़त मिलती दिख रही है, जिसमें उसे 80% वोट मिल सकते हैं, जबकि महागठबंधन को 15%, जनसुराज को 3% और अन्य को 2% वोट मिलने की संभावना जताई गई है।
गौरतलब है भाजपा की इंटरनल सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, पासवान वोट बैंक में टूटने की संभावना है, जिसमें से 22% वोट महागठबंधन की ओर जाते दिख रहे हैं। प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी को भी पासवानों के 3% वोट मिलने का अनुमान है। वहीं, यादव समुदाय का 84% वोट महागठबंधन को मिलने की संभावना जताई गई है, जबकि एनडीए को 12%, जनसुराज को 2% और अन्य दलों को 2% वोट मिलने की बात कही गई है। बता दें, 2020 के विधानसभा चुनाव में एनडीए और महागठबंधन के बीच कांटे की टक्कर थी। इन दोनों में वोट शेयर का अंतर काफी कम था। एनडीए को जहां 37.3 फीसदी वोट मिले थे, तो वहीं महागठबंधन के खाते में 37.2 फीसदी वोट गया था और लोजपा 05.66% वोट मिला था।