बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार इन दिनों अपनी सादगी और जनता के बीच बढ़ती सक्रियता को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में जब वे अपने पैतृक गांव कल्याणबिगहा पहुंचे, तो वहां का नजारा किसी पारिवारिक उत्सव जैसा था। इस दौरे की एक खास झलक सोशल मीडिया और सियासी गलियारों में खूब चर्चा बटोर रही है, जिसमें निशांत कुमार और गांव की महिलाओं के बीच एक बेहद ही आत्मीय और खुशनुमा संवाद देखने को मिला। निशांत की सही जन्मतिथि को लेकर जेडीयू के वरिष्ठ नेता और मंत्री डॉ. अशोक चौधरी ने स्थिति स्पष्ट की है। दरअसल, हाल के दिनों में निशांत कुमार लगातार पार्टी कार्यक्रमों और जनसंपर्क अभियानों में दिखाई दे रहे हैं।

गांव की ‘चाची-दादी’ ने छेड़ दी शादी की बात;
कल्याणबिगहा पहुंचने पर निशांत कुमार का स्वागत किसी बाहरी नेता की तरह नहीं, बल्कि ‘घर के बेटे’ की तरह हुआ। जब वे स्थानीय लोगों का हाल-चाल जान रहे थे, तभी गांव की कुछ बुजुर्ग महिलाओं ने उन्हें घेर लिया। बातों-बातों में महिलाओं ने बड़े ही स्नेह और मजाकिया लहजे में निशांत से कह दिया कि “अब आपको अपना घर बसा लेना चाहिए, अपना परिवार आगे बढ़ाना चाहिए।” सीधे शब्दों में कहें तो, गांव की महिलाओं ने उन्हें जल्द से जल्द शादी के बंधन में बंधने की सलाह दे डाली।

निशांत की मुस्कान और ठहाकों का माहौल;
महिलाओं की इस ‘गुगली’ पर निशांत कुमार भी खुद को मुस्कुराने से नहीं रोक पाए। उन्होंने किसी गंभीर राजनेता की तरह प्रतिक्रिया देने के बजाय एक शर्मीली मुस्कान दी, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति का दिल जीत लिया। निशांत का यह अंदाज देख वहां उपस्थित सुरक्षाकर्मी, स्थानीय कार्यकर्ता और ग्रामीण भी खिलखिलाकर हंस पड़े। कुछ देर के लिए कल्याणबिगहा की गलियां ठहाकों से गूंज उठीं और माहौल पूरी तरह से तनावमुक्त और भावुक हो गया।

बढ़ती सक्रियता और बदलता अंदाज;
निशांत कुमार आमतौर पर प्रचार और राजनीति की चकाचौंध से दूर रहना पसंद करते हैं, लेकिन पिछले कुछ समय से उनके व्यवहार में एक बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। जनसंवाद में वे अब केवल धार्मिक या निजी कार्यक्रमों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पैतृक गांव जाकर लोगों की समस्याएं सुन रहे हैं। सुरक्षा के घेरे के बावजूद वे ग्रामीणों से जमीन पर जुड़कर बात करते हैं, जो उनकी लोकप्रियता बढ़ा रहा है। राजनीतिक जानकार निशांत की इस सक्रियता को उनके भविष्य के सार्वजनिक जीवन से जोड़कर देख रहे हैं, हालांकि निशांत ने खुद कभी इसे राजनीति से नहीं जोड़ा है।