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हजारीबाग : जम्मू कश्मीर के अखनूर में आई ई डी ब्लास्ट में शहीद हुए हजारीबाग के लाल कैप्टन करमजीत सिंह बक्शी का पार्थिव शरीर जैसे ही हजारीबाग पहुंचा मानो पूरे हजारीबाग में सन्नाटा छा गया। हर ओर कैप्टन करमजीत सिंह बक्शी अमर रहे, हिंदुस्तान जिंदाबाद, वंदे मातरम, जब तक सूरज चांद रहेगा करमजीत तुम्हारा नाम रहेगा गुंजायमान होता रहा। रामगढ़ पंजाब रेजिमेंटल सेंटर से शहीद के पार्थिव शरीर को लेकर हजारीबाग के भारत माता चौक पहुंचा।
जिसके बाद शहीद करमजीत सिंह बक्शी का पार्थिव शरीर उनके हजारीबाग के जुल्लू पार्क स्थित पैतृक आवास पहुंचा, जहां हजारीबाग उपायुक्त नैंसी सहाय, हजारीबाग पुलिस अधीक्षक अरविंद कुमार सिंह ने सलामी दी। जिसके बाद शहीद का पार्थिव शरीर अन्नदा चौक होते हुए गुरुद्वारा पहुंचा जहां अरदास के पश्चात पुन: अंतिम यात्रा निकली। अंतिम यात्रा झंडा चौक खिरगांव होते हुए मुक्ति धाम पहुंचा। मुक्तिधाम में शहीद के पार्थिव शरीर पर अंतिम सलामी दी गई जिसके बाद शहीद के पिता अजिंदर सिंह बक्शी ने मुखाग्नि दी।

मुखाग्नि के दौरान मुक्तिधाम में उपस्थित लोगों के आंखों से आंसु छलक पड़े लोग, गमगीन माहौल में एक दूसरे को देख रो पड़े। शव यात्रा के दौरान विभिन्न चौक चौराहों पर एवं अंतिम यात्रा वाले मार्ग के सैकड़ों घरों से अमर शहीद के पार्थिव शरीर पर पुष्पवर्षा किया। शहीद के अंतिम यात्रा में हजारों लोग शामिल हुए। अंतिम यात्रा के दौरान ऐसा लग रहा था मानो हजारीबाग कुछ पल के लिए थम सा गया। एक ओर जहां शहीद कैप्टन करमजीत सिंह बक्शी की शहादत से परिवार के साथ साथ पूरा शहर मर्माहत है वहीं शहीद के परिवार को इस बात का गर्व है कि उनका बेटा देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।
शहीद कैप्टन करमजीत सिंह के पिता अजिनदर सिंह बक्शी ने बताया कि करमजीत सिंह को बचपन से ही आर्मी में जाने की इच्छा थी। करमजीत बचपन से ही अक्सर यह कहा करता था कि एक दिन ऐसा काम करूंगा जिस पर हजारीबाग के साथ साथ पूरा देश मुझपर गर्व करेगा। जम्मू-कश्मीर के अखनूर सेक्टर में लाइन आॅफ कंट्रोल (एलओसी) के पास मंगलवार को हुए आईईडी धमाके में सेना के एक कैप्टन समेत दो जवान शहीद हो गए। वहीं एक जवान घायल है। शहीद कैप्टन करमजीत सिंह बक्शी उर्फ पुनीत हजारीबाग के जुलू पार्क के रहनेवाले थे।
वे अजिनदर सिंह बक्शी और नीलू बक्शी के एकलौते पुत्र थे। सैन्य अधिकारियों के अनुसार, मंगलवार को पेट्रोलिंग के दौरान आतंकियों के द्वारा बिछाई गई आईईडी में ब्लास्ट हो गया, जिसकी चपेट में आकर वे घायल हो गए। घायल होने के बाद सेना के द्वारा उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के क्रम में मौत हो गई थी। जम्मू-कश्मीर के अखनूर में एलओसी पर पोस्टेड सरदार करमजीत सिंह बक्शी की आगामी पांच अप्रैल को शादी होने वाली थी।
इसकी तैयारी के लिए वे 10 दिन पहले ही हजारीबाग में थे। शादी तय होने के बाद वे ड्यूटी पर कश्मीर चले गए थे। परिजनों के अनुसार, हजारीबाग में 29 मार्च को शादी से जुड़ी रस्में निभाई जानी थीं। इसके बाद जम्मू में ही पांच को शादी तय थी।