गोपालगंज के युवा तेज गेंदबाज साकिब हुसैन ने IPL में अपने पहले ही मैच में शानदार छाप छोड़ी। उन्होंने 4 ओवर में सिर्फ 24 रन देकर 4 विकेट झटके। उनके शिकार बने यशस्वी जायसवाल, डोनोवन फरेरा, जोफ्रा आर्चर और रवि बिश्नोई जैसे बड़े खिलाड़ी।

साकिब को सनराइजर्स हैदराबाद ने 30 लाख रुपए में खरीदा था, और उन्हें मैच से सिर्फ एक दिन पहले प्लेइंग इलेवन में शामिल किए जाने की जानकारी मिली थी। बिहार के एक छोटे से गांव से निकलकर IPL तक पहुंचने का उनका सफर बेहद संघर्षपूर्ण रहा है। साकिब का सपना शुरुआत में क्रिकेटर बनने का नहीं, बल्कि आर्मी में जाने का था। उनके पिता मजदूरी करते हैं और घर की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। क्रिकेट खेलने के लिए उनके पास अच्छे जूते तक नहीं थे—वह फटे जूतों में ही गेंदबाजी करते थे। ऐसे समय में उनकी मां ने अपने गहने गिरवी रखकर उन्हें जूते दिलाए। घर चलाने के लिए साकिब टेनिस बॉल मैच खेलते थे, जहां एक मैच के बदले 500–700 रुपए मिलते थे। वह जसप्रीत बुमराह को अपना आदर्श मानते हैं। मिंज स्टेडियम में दौड़ने जाते समय उन्होंने खिलाड़ियों को देखा और यहीं से क्रिकेट में रुचि जगी। इंटर तक पढ़ाई के बाद उन्होंने पूरी तरह क्रिकेट पर ध्यान दिया। उन्होंने 2021 में बिहार क्रिकेट लीग में खेलकर अपने करियर की शुरुआत की, इसके बाद चंडीगढ़ में अंडर-19 प्रतियोगिता में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बने। उनके शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्हें नेशनल क्रिकेट एकेडमी, बेंगलुरु तक पहुंचने का मौका मिला और आगे चलकर सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में भी खेलने का अवसर मिला। इसके अलावा, वह चेन्नई सुपर किंग्स के लिए नेट बॉलर भी रह चुके हैं।

नेट बॉलर रहते हुए साकिब की मुलाकात महेंद्र सिंह धोनी से हुई। धोनी ने उनकी गेंदबाजी की सराहना करते हुए कहा कि वे मेहनत जारी रखें, क्योंकि चयन उनके नियंत्रण में नहीं है। यह बात साकिब के लिए बड़ी प्रेरणा बनी। अपने पहले ही मैच में साकिब ने शुरुआत यशस्वी जायसवाल का विकेट लेकर की। बाद में उन्होंने डोनोवन फरेरा को क्लीन बोल्ड किया और अहम साझेदारी तोड़ी। फिर 17वें ओवर में लगातार दो विकेट लेकर मैच में अपनी पकड़ मजबूत कर ली। साकिब ने IPL डेब्यू में सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शन करने वाले भारतीय गेंदबाजों में अपना नाम दर्ज करा लिया। उन्होंने अश्विनी कुमार के रिकॉर्ड की बराबरी की, जिन्होंने 2025 में 4/24 का प्रदर्शन किया था। मैच के बाद साकिब ने कहा कि उन्होंने खुद को मानसिक रूप से तैयार रखा था और मौका मिलने पर अपना सर्वश्रेष्ठ देने पर फोकस किया। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय टीम के गेंदबाजी कोच वरुण एरोन को भी दिया। यह कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की सफलता नहीं, बल्कि संघर्ष, परिवार के त्याग और मेहनत की मिसाल है।