“पैर छूने से लेकर गमला कांड तक”… नीतीश कुमार की इन 10 ‘विचित्र’ हरकतों ने कैसे बदल दी बिहार की सियासी तस्वीर?…

Ritu Raj

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हालिया व्यवहारों ने न केवल राजनीतिक गलियारों में बल्कि आम जनता के बीच भी कई सवाल खड़े किए हैं। पिछले कुछ महीनों में उनके सार्वजनिक आचरण में आए बदलावों को स्वास्थ्य और बढ़ती उम्र से जोड़कर देखा जा रहा है।

नीतीश कुमार के 10 चर्चित और विवादास्पद व्यवहार;

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तारीखघटनाक्रमविवरण
15 दिसंबर, 2025हिजाब विवादएक नियुक्ति पत्र वितरण समारोह के दौरान सीएम एक महिला आयुष डॉक्टर का हिजाब खींचते नजर आए। पास खड़े डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने उन्हें रोकने की कोशिश की।
20 नवंबर, 2025PM के पैर छूना10वीं बार शपथ लेने के बाद एयरपोर्ट पर पीएम मोदी को विदा करते समय नीतीश उनके पैर छूने के लिए झुके, जिसे पीएम ने तुरंत रोक दिया।
26 मई, 2025IAS के सिर पर गमलाशिक्षा विभाग के ACS एस. सिद्धार्थ ने जब उन्हें पौधा भेंट किया, तो मुख्यमंत्री ने वही गमला उठाकर आईएएस अधिकारी के सिर पर रख दिया।
20 मार्च, 2025राष्ट्रगान के दौरान हंसीपटना के एक कार्यक्रम में राष्ट्रगान बजने के दौरान वे हंसी-मजाक करते दिखे। अधिकारियों के टोकने पर वे मीडिया को प्रणाम करने लगे।
15 मार्च, 2025रविशंकर प्रसाद के पैर छूनाउम्र में बड़े होने के बावजूद नीतीश कुमार ने बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद के पैर छूने की कोशिश की, जिससे वहां मौजूद नेता असहज हो गए।
30 जनवरी, 2025श्रद्धांजलि सभा में तालीमहात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर बापू को नमन करने के बाद वे ताली बजाने लगे। विधानसभा अध्यक्ष नंदकिशोर यादव ने उन्हें हाथ पकड़कर शांत किया।
30 नवंबर, 2024मंत्री के ब्रेसलेट से खेलनाविधानसभा सत्र के दौरान वे सदन के भीतर ही मंत्री अशोक चौधरी के हाथ में बंधे ब्रेसलेट से काफी देर तक खेलते हुए दिखे।
15 अक्टूबर, 2024धनुष-बाण फेंकनागांधी मैदान में रावण वध के दौरान परंपरा के अनुसार तीर चलाने के बजाय उन्होंने धनुष और बाण को ही मंच से नीचे फेंक दिया।
21 सितंबर, 2024मंत्री के कंधे पर सिर रखनाएक सार्वजनिक कार्यक्रम में उन्होंने मंत्री अशोक चौधरी के कंधे पर सिर रखकर उन्हें गले लगा लिया और कहा कि वह उनसे बहुत प्रेम करते हैं।
जून व नवंबर, 2024बार-बार झुकनाएनडीए की बैठक और दरभंगा एम्स के शिलान्यास के दौरान भी नीतीश कुमार ने सार्वजनिक मंच पर प्रधानमंत्री के पैर छूकर सबको चौंका दिया था।

हालांकि, इन घटनाओं ने बिहार की प्रशासनिक स्थिरता पर चर्चा छेड़ दी है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इन “अटपटे” व्यवहारों के पीछे गिरता स्वास्थ्य एक बड़ा कारण हो सकता है। यही वजह है कि अब उनके दिल्ली जाने और बिहार की कमान भाजपा की सहमति से किसी नए चेहरे को सौंपने की अटकलें तेज हैं।

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