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पटना में NEET की तैयारी कर रही छात्रा के साथ दुष्कर्म और संदिग्ध मौत के मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। सोमवार को शंभू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक मनीष रंजन की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत का रुख बेहद कड़ा रहा। कोर्ट ने जांच एजेंसी CBI और स्थानीय पुलिस (SIT) से कई तीखे सवाल पूछे, जिसके बाद मामले की अगली सुनवाई के लिए 11 मार्च की तारीख तय की गई है।
CBI और SIT की जांच पर कोर्ट के कड़े सवाल
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने CBI से पूछा कि जब यह मामला एक नाबालिग छात्रा और यौन उत्पीड़न से जुड़ा है, तो अब तक पॉक्सो (POCSO) एक्ट क्यों नहीं लगाया गया? कोर्ट ने जांच के विरोधाभासों को पकड़ते हुए पूछा कि मनीष रंजन की इस पूरे प्रकरण में अब तक क्या भूमिका स्पष्ट हुई है और क्या उन्हें अभी भी हिरासत में रखने की आवश्यकता है?
वहीं, SIT ने अदालत में कहा कि मनीष एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं, इसलिए उन्हें गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, अब केस CBI के पास है, तो SIT को उनकी और जरूरत नहीं है। इस पर कोर्ट ने सबूतों की स्थिति और मनीष के खिलाफ दर्ज ठोस आरोपों की जानकारी मांगी।
थानेदार और SIT के बयानों में अंतर, सबूतों से छेड़छाड़ का आरोप
अदालत ने प्रारंभिक जांच करने वाली तत्कालीन थानेदार रौशनी कुमारी को भी आड़े हाथों लिया। कोर्ट ने पूछा कि हॉस्टल का DVR और जब्त मोबाइल 24 घंटे के भीतर कोर्ट में पेश क्यों नहीं किए गए? सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात तब सामने आई जब रौशनी कुमारी ने कहा कि उन्होंने 17 जनवरी को सबूत SIT को दे दिए थे, जबकि SIT का कहना है कि उन्हें सामग्री 24 जनवरी को मिली।
7 दिनों के इस अंतर और FSL जांच में देरी पर कोर्ट ने गंभीर टिप्पणी की। पीड़ित पक्ष ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि रसूखदारों को बचाने के लिए साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की गई है।
अस्पताल की रिपोर्ट में विरोधाभास: नशे का ओवरडोज या दुष्कर्म?
इस बीच, CBI ने प्रभात अस्पताल की एक महिला स्टाफ से 5 घंटे तक पूछताछ की। महिला स्टाफ ने खुलासा किया कि जब छात्रा को अस्पताल लाया गया, तब उसके शरीर पर खरोंच के निशान थे और अस्पताल में उसके साथ गलत हरकत होने की चर्चा थी।
विवाद का मुख्य बिंदु यह है कि अस्पताल की शुरुआती रिपोर्ट में मौत की वजह ‘नशीली दवा का ओवरडोज’ बताई गई थी, जबकि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से दुष्कर्म का जिक्र है। इस विरोधाभास ने पूरी जांच प्रक्रिया को संदिग्ध बना दिया है। 11 मार्च की सुनवाई इस केस के लिए निर्णायक साबित हो सकती है। कोर्ट ने मनीष रंजन की लोकेशन, उनके बिहार से बाहर जाने और गिरफ्तारी के समय को लेकर भी विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अब देखना यह है कि CBI इन तीखे सवालों का क्या जवाब देती है।