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पटना: आज 30 जनवरी को भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को नई दिल्ली के बिड़ला हाउस में नाथूराम गोडसे द्वारा गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस दिन को शहीद दिवस के रूप में मनाते है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का बिहार से विशेष नाता रहा। चंपारण आंदोलन से लेकर पटना स्थित गांधी आश्रम तक, बापू की कई महत्वपूर्ण यादें बिहार से जुड़ी हुई हैं। आज भले ही महात्मा गांधी हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके आदर्श और विचार हमें निरंतर प्रेरित करते हैं। पटना में बापू से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घटनाएं हुई हैं, जिनमें बापू टावर की स्थापना भी शामिल है।
महात्मा गांधी 10 अप्रैल 1917 को पहली बार पटना आए थे। उस वक्त वे कोलकाता से तृतीय श्रेणी की रेलगाड़ी में बैठकर पटना पहुंचे थे, तब पटना जंक्शन को बांकीपुर जंक्शन कहा जाता था। यह महात्मा गांधी का पहला मौका था जब उन्होंने बिहार की भूमि पर कदम रखा था। चंपारण सत्याग्रह, बिहार विद्यापीठ की स्थापना और स्वतंत्रता संग्राम की अन्य घटनाओं के कारण गांधी जी का पटना आना-जाना लगातार बना रहा।
गांधी जी को पटना लाने के पीछे पं. राजकुमार शुक्ल की अहम भूमिका थी। बिहार सर्वोदय मंडल के अध्यक्ष चंद्र भूषण ने बताया कि पं. राजकुमार शुक्ल की जिद पर गांधी जी पटना आए थे। गांधी जी के पटना आगमन की जानकारी मिलने पर उनके पुराने मित्र मौलाना मजहरूल हक ने उन्हें अपनी मोटर गाड़ी से फ्रिजर रोड स्थित अपने घर ‘सिकंदर मंजिल’ पर पहुंचाया।
गांधी जी का पटना आना-जाना चंपारण सत्याग्रह, बिहार विद्यापीठ की स्थापना, स्वतंत्रता संग्राम और अन्य घटनाओं से जुड़ा था। आजादी से पहले अंग्रेजों का रेसकोर्स कहा जाने वाला बांकीपुर लॉन, जिसे अब गांधी मैदान के नाम से जाना जाता है, में 1942 में गांधी जी ने हर रोज प्रार्थना सभा आयोजित की थी। बता दें पटना में गांधी जी ने 3 जून 1917 को पीरबहोर स्थित दरभंगा हाउस में एक गोपनीय बैठक में भाग लिया था। इस बैठक में मौलाना मजहरूल हक, मदन मोहन मालवीय, हबुआ के महाराज बहादुर राय बहादुर कृष्ण शाही, मोहम्मद मुसा युसुफ, राम गोपाल चौधरी और कृष्णा प्रसाद जैसे महत्वपूर्ण व्यक्ति शामिल थे। गांधी जी सात जून 1917 को रांधी से पटना लौटे थे।
महात्मा गांधी ने तीसरी बार पटना का दौरा एक दिसंबर 1920 को किया था। इस दौरान वे सदाकत आश्रम में मौलाना मजहरूल हक के साथ रहे और फिर दो दिसंबर को फुलवारीशरीफ गए। तीन दिसंबर को वे फिर से आश्रम लौटे थे। महात्मा गांधी की इन यात्रा और गतिविधियों से पटना और बिहार के इतिहास में उनका विशेष स्थान है, और उनकी शिक्षाएं आज भी लोगों को प्रेरित करती हैं।