बुक लवर्स के लिए खुशखबरी! 5–16 दिसंबर तक गांधी मैदान में साहित्यिक मेला…

Ritu Raj

बिहार का ऐतिहासिक पटना पुस्तक मेला एक बार फिर भव्य रूप में लौट रहा है। 41 वर्षों की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इसका उद्घाटन 5 नवंबर को गांधी मैदान में होगा। तैयारियों के अंतिम चरण में पहुंच चुके इस मेले को लेकर आयोजकों ने आज प्रेस वार्ता कर प्रमुख जानकारियाँ साझा कीं।

पुस्तक मेला संयोजक अमित झा ने प्रेस वार्ता में बताया कि 5 दिसंबर को दोपहर 1 बजे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मेले का औपचारिक उद्घाटन करेंगे, जबकि उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे। 5 से 16 दिसंबर तक चलने वाला यह पुस्तक मेला इस बार कई मायनों में अनोखा होगा। पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरने वाला साहित्यकार रत्नेश्वर का विश्व का सबसे महंगा ग्रंथ ‘मैं’, जिसकी कीमत 15 करोड़ रुपये है, प्रदर्शित किया जाएगा। हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में उपलब्ध यह कृति दर्शकों के लिए बड़ा आकर्षण बनेगी, साथ ही आगंतुकों को इसके साथ सेल्फी लेने की भी अनुमति रहेगी। अनुमान है कि लगभग 6 लाख से अधिक लोग इस अनूठे आयोजन का हिस्सा बनेंगे। गांधी मैदान में प्रवेश रामगुलाम चौक स्थित 10 नंबर गेट से होगा। मेले में तीन मुख्य गेट बनाए गए हैं, जिन पर टिकट काउंटर की व्यवस्था रहेगी। यूनिफॉर्म में आने वाले स्कूल बच्चों का प्रवेश बिल्कुल मुफ्त होगा, जबकि सोमवार से शुक्रवार तक कॉलेज छात्रों को बिना शुल्क टिकट उपलब्ध कराया जाएगा।

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दरअसल, इस वर्ष का पटना पुस्तक मेला देश के प्रख्यात कथाकार अवधेश प्रीत को समर्पित किया गया है। वहीं मेले के एक्टिविटी ज़ोन को मशहूर शायर क़ासिम खुर्शीद के नाम से सुसज्जित किया गया है। पूरे मेला परिसर में इस बार भारतीय ऋषि-परंपरा की झलक देखने को मिलेगी। तीनों मुख्य द्वारों के साथ ही मेले में स्थित विभिन्न मंच और भवन भी महर्षियों के नाम पर रखे गए हैं। इनमें धन्वंतरि प्रशासनिक भवन, व्यास मंच, कश्यप मंच, माधव कला दीर्घा, भृगु हॉल और आचार्य सुश्रुत थिएटर विशेष आकर्षण का केंद्र होंगे। हालांकि, पिछले वर्ष की तुलना में इस बार कार्यक्रमों की संख्या और विविधता दोनों में बड़ा विस्तार किया गया है। 300 से अधिक नए आयोजन मेले को और जीवंत बनाएंगे। ‘तेरी मेरी प्रेम कहानी’, कवि सम्मेलन, मुशायरा, ‘ज्ञान और गुरुकुल’, ‘संपादक से संवाद’, ‘युवा स्वर’, ‘जनसंवाद’, ‘स्कूल उत्सव’ और ‘हमारे हीरो’ जैसे कार्यक्रम पाठकों और आगंतुकों को एक बहुआयामी अनुभव देंगे। वहीं, इस बार मेले की थीम ‘वेलनेस: ए वे ऑफ लाइफ’ रखी गई है। स्वास्थ्य-संवाद श्रृंखला के अंतर्गत देशभर के प्रतिष्ठित डॉक्टर हृदय, मस्तिष्क, त्वचा, हड्डी, पोषण, फिजियोथेरेपी, मधुमेह, गुर्दा और मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषयों पर उपस्थित दर्शकों से सीधे संवाद करेंगे। यह पहल मेले को सिर्फ साहित्यिक नहीं, बल्कि जीवनशैली और स्वास्थ्य जागरूकता का भी एक महत्वपूर्ण मंच बना देगी।

फिल्म, साहित्य और संस्कृति का यह संगम पटना पुस्तक मेला को इस बार और भी खास बना रहा है। बड़ी संख्या में प्रकाशकों की मौजूदगी, विविध कार्यक्रमों की चमक और सिनेमा प्रेमियों के लिए तैयार विशेष सेक्शन मेले को बहु-आयामी रूप देता है। चाहे पाठक हों, विद्यार्थी, शोधकर्ता या कला प्रेमी, वो हर किसी के लिए यहां कुछ न कुछ खास देखने-सुनने को मिलेगा। 5 से 16 दिसंबर तक चलने वाला यह महोत्सव न केवल किताबों का उत्सव होगा, बल्कि रचनात्मकता, संवाद और कला का एक जीवंत उत्सव भी साबित होगा।

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