सिटी पोस्ट लाइव
बिहार के संसदीय इतिहास में आज 5 मार्च, 2026 का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया। पटना विधानसभा परिसर आज उस वक्त एक अभूतपूर्व घटना का गवाह बना, जब राज्य की सत्ताधारी गठबंधन (NDA) के तीन प्रमुख दलों के राष्ट्रीय अध्यक्षों ने एक साथ राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। इस ऐतिहासिक पल की गरिमा बढ़ाने के लिए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह स्वयं मौजूद रहे, जिसने इस पूरे घटनाक्रम को राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया है।
दिग्गज नेताओं का ‘त्रिवेणी संगम’
बिहार की राजनीति में यह पहला अवसर है जब तीन अलग-अलग विचारधाराओं और दलों के शीर्ष नेतृत्व ने एक ही मंच से अपनी उम्मीदवारी पेश की। नामांकन करने वाले दिग्गजों में शामिल हैं:
नीतीश कुमार: जनता दल यूनाइटेड (JDU) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के निवर्तमान मुख्यमंत्री।
नितिन नवीन: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष।
उपेंद्र कुशवाहा: राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के अध्यक्ष।
इन तीनों कद्दावर नेताओं का एक साथ पर्चा भरना न केवल एक रिकॉर्ड है, बल्कि यह विपक्षी खेमे के लिए एनडीए की अटूट एकजुटता का एक कड़ा संदेश भी है।
अमित शाह की मौजूदगी: एकजुटता का महा-संदेश
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का विशेष रूप से इस नामांकन प्रक्रिया में शामिल होने के लिए पटना आना, बिहार के प्रति बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व की गंभीरता को दर्शाता है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि शाह की मौजूदगी यह सुनिश्चित करने के लिए थी कि बिहार में सत्ता हस्तांतरण और राज्यसभा का यह सफर पूरी तरह सुचारू और सर्वसम्मति से संपन्न हो। विधानसभा परिसर एनडीए समर्थकों के नारों से गूंज उठा, जिससे वहां का माहौल किसी बड़े उत्सव जैसा प्रतीत हो रहा था।
बना बिहार की राजनीति का नया रिकॉर्ड
इससे पहले बिहार से कई दिग्गज नेता राज्यसभा गए हैं, लेकिन सांगठनिक तालमेल का ऐसा ‘पावर शो’ पहले कभी नहीं देखा गया। एक ही समय पर तीन राष्ट्रीय अध्यक्षों का नामांकन करना एक ऐसा रिकॉर्ड है जिसे तोड़ पाना भविष्य में कठिन होगा। गठबंधन के नेताओं ने इसे आपसी भरोसे और आगामी 2025-26 की चुनौतियों से निपटने के लिए एक साझा ‘युद्ध रणनीति’ का हिस्सा बताया है।
क्या होगा आगे का असर?
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के साथ ही बिहार की कमान अब नए हाथों में जाने का रास्ता साफ हो गया है। तीन राष्ट्रीय अध्यक्षों का यह साथ, बिहार की भविष्य की राजनीति में एक नए समीकरण की नींव रखता दिख रहा है, जहाँ बीजेपी अब ‘बड़े भाई’ की भूमिका में पूरी तरह स्थापित हो चुकी है।