CM नीतीश ने नहीं मानी शर्त तो बड़ा खेल कर सकते हैं आनंद मोहन

Deepak Sharma

सिटी पोस्ट लाइव
बाहुबली नेता पूर्व सांसद आनंद मोहन इसबार के चुनाव में अपने दोनों बेटे और एक बेटी को मैदान में उतारना चाहते हैं। सिटी पोस्ट लाइव के साथ ख़ास बातचीत में उन्होंने इस बात का संकेत दिया है कि उनके दूसरे बेटे और एकलौती बिटिया को विधान सभा चुनाव लड़ना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि उनके बच्चों ने उनकी गैर-मौजूदगी में उनकी राजनीतिक विरासत को संभाल कर दुनिया को दिखा दिया है। उनका राजनीति में आना परिवारवाद नहीं कहा जा सकता। गौरतलब है कि शनिवार को उन्याहोंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाक़ात की है।

महा-गठबंधन से अलग होकर NDA के साथ सरकार बनाने के बाद नीतीश कुमार के विश्वास मत हासिल करने के दौरानआनंद मोहन ने बड़ी भूमिका निभाई थी। उन्होंने अपने बेटे आरजेडी विधायक चेतन आनंद को नीतीश कुमार के पीछे खड़ा कर माहौल बदल दिया था। चेतन आनंद के जेडीयू के साथ आने के साथ ही तेजस्वी यादव का खेला खराब हो गया था। उनके तीन विधायकों ने पाला बदल लिया था। आरजेडी विधायक प्रहलाद यादव और anant सिंह की पत्नी पूनम देवी आरजेडी छोड़कर सरकार के साथ कह दे हो गये थे। आनंद मोहन और अनंत सिंह ने पूरी बाजी पलट कर रख दी थी। चेतन आनंद को मंत्री का बंगला तो मिल गया लेकिन मंत्री नहीं बनाए गये। अनंत सिंह को इनाम में AK-47 मामले में राहत मिली।

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शनिवार को आनंद मोहन और अनंत सिंह दोनों बाहुबली मुख्यमंत्री से मिले थे। अनंत सिंह नीतीश कुमार से मिल कर जब निकले, तो उनका बॉडीलैंग्वेज साफ़ बता रहा था कि वो जिस मकसद से नीतीश कुमार से मिलने गए थे, अभी पूरा नहीं हो पाया है। कोई गारंटी नहीं मिली है। आनंद मोहन सिंह ने अपना ऑप्शन ओपन रखा है। अभी भी वो लालू यादव की शान में कशीदे गढ़ रहे हैं।उन्होंने कहा कि बिहार की राजनीति में लालू यादव की जगह कोई दूसरा नहीं ले सकता। जाहिर है अगर नीतीश कुमार के साथ बात नहीं बनी तो वो पाला बदल सकते हैं। अभीतक उन्होंने इसीलिए किसी दल की सदस्यता नहीं ली है। आनंद मोहन सिंह शिवहर के साथ साथ बेलसंड और नवीनगर सीट पर अपना दावा ठोंक रहे हैं। इसमे शक की कोई गुंजाइश नहीं कि नीतीश कुमार को इन दोनों बाहुबलियों की जरूरत है। लेकिन राजनीति में कब क्या हो जाए कोई नहीं जानता।

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