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बिहार को एक औद्योगिक हब के रूप में विकसित करने की दिशा में नीतीश सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य में निवेश करने वाले उद्योगपतियों को बिजली की कमी न हो, इसके लिए ऊर्जा विभाग ने 838 मेगावाट बिजली विशेष रूप से रिजर्व कर दी है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश में लगने वाली नई फैक्ट्रियों को निर्बाध और स्मूथ बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि उत्पादन में कोई बाधा न आए।
9602 मेगावाट तक पहुँच सकती है डिमांड
बिजली कंपनी मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस वर्ष बिहार में बिजली की कुल मांग 9602 मेगावाट तक पहुँचने का अनुमान है। उद्योगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए केवल बिजली उत्पादन ही नहीं, बल्कि ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन लाइन के विस्तार पर भी युद्धस्तर पर काम चल रहा है।
वर्तमान में, बिहार में 175 ग्रिड उपकेंद्रों के माध्यम से बिजली की आपूर्ति की जा रही है, जिसके लिए 21,165 किलोमीटर लंबा ट्रांसमिशन नेटवर्क बिछा हुआ है। इस नेटवर्क की क्षमता को और अधिक आधुनिक और सशक्त बनाने के लिए राज्य में 16 नए ग्रिड उपकेंद्रों का निर्माण तेजी से किया जा रहा है।
2026-27 के लिए क्या है तैयारी?
राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, बिजली की उपलब्धता में निरंतर सुधार हो रहा है। साल 2025-26 में जहां बिजली की उपलब्धता 9237 मेगावाट थी, वहीं अब साल 2026-27 में यह बढ़कर 10,440 मेगावाट हो गई है। बड़े उद्योगों को मुख्य रूप से 33 KV और 11 KV लाइनों पर बिजली की सप्लाई दी जाती है, जिसके लिए नेटवर्क क्षमता को अपग्रेड किया जा रहा है।
बिजली आपूर्ति के मुख्य स्रोत
बिहार अपनी बिजली की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विभिन्न प्रमुख स्रोतों पर निर्भर है, जिसमें NTPC की 6,996 मेगावाट के साथ सबसे बड़ी हिस्सेदारी है। इसके अतिरिक्त, लखीसराय के कजरा में 185 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजना से आपूर्ति हो रही है, जबकि चौसा बिजली घर की दूसरी यूनिट को चालू करने का कार्य अंतिम चरण में है। साथ ही, नवीनगर (स्टेज-2) की तीन नई यूनिट्स और पीरपैंती में भी नए पावर प्लांट का निर्माण कार्य काफी तेजी से किया जा रहा है ताकि भविष्य की जरूरतों को पूरा किया जा सके।
सरकार उद्योगपतियों के साथ लगातार समझौते (MoU) कर रही है। ऊर्जा विभाग की यह ‘रिजर्व पावर’ प्लानिंग निवेश के माहौल को और बेहतर बनाएगी। जब बुनियादी ढांचा मजबूत होगा, तभी राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और बिहार की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।