सिटी पोस्ट लाइव
एशिया के दूसरे सबसे बड़े अस्पताल, पटना मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल (पीएमसीएच) में जूनियर डॉक्टर और इंटर्न अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर की गई इस हड़ताल ने अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर गहरा असर डाला है, जिससे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

₹20,000 के मानदेय को ₹40,000 करने की मांग
हड़ताल पर गए डॉक्टरों का कहना है कि वे वर्तमान में ₹20,000 के मानदेय पर काम कर रहे हैं, जो उनके काम के बोझ और महंगाई के हिसाब से बहुत कम है। उनकी मुख्य मांग है कि उनके मानदेय को बढ़ाकर ₹40,000 कर दिया जाए। डॉक्टरों का यह भी कहना है कि उन्होंने अपनी मांगों को लेकर कई महीनों से वरीय अधिकारियों और यहां तक कि स्वास्थ्य मंत्री को भी पत्र लिखे हैं और गुहार लगाई है, लेकिन उनकी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
मरीजों की बढ़ी मुश्किलें, अस्पताल में अफरातफरी

जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के कारण पीएमसीएच जैसे बड़े अस्पताल में मरीजों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। ओपीडी और इमरजेंसी सेवाओं पर इसका सीधा असर दिख रहा है, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। कई मरीजों को बिना इलाज के ही वापस लौटना पड़ रहा है। अस्पताल में अफरातफरी का माहौल है और लोग जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान चाहते हैं। डॉक्टरों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, तब तक वे हड़ताल जारी रखेंगे। इस गतिरोध से अस्पताल प्रशासन और सरकार दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।