LG मनोज सिन्हा ने पोंछे आतंक पीड़ितों के आंसू; कहा- ‘मां को भीख मांगनी पड़ी, अब सिस्टम निभाएगा फर्ज’

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शनिवार को श्रीनगर के लोक भवन में आयोजित एक अत्यंत भावुक समारोह के दौरान आतंकवाद के शिकार परिवारों को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र सौंपे। इस दौरान एलजी सिन्हा ने न केवल पीड़ितों को न्याय और सम्मान देने का वादा निभाया, बल्कि पिछले सिस्टम की खामियों पर कड़ा प्रहार भी किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब जम्मू-कश्मीर में ‘आतंकवादी इकोसिस्टम’ को जड़ से उखाड़ फेंकने का समय आ गया है।

भावुक हुए एलजी: सुनाई रोंगटे खड़े करने वाली कहानी
समारोह के दौरान उपराज्यपाल उस समय भावुक हो गए जब उन्होंने एक पीड़ित परिवार की व्यथा साझा की। उन्होंने बताया कि एक पीड़ित ने उनसे मिलकर अपना दर्द बयां किया कि कैसे आतंकियों ने उनका घर तबाह कर दिया, जिसके बाद उसकी मां को अपने बच्चों का पेट भरने के लिए सड़कों पर भीख मांगनी पड़ी। एलजी ने कहा, “ऐसी कहानियां सुनकर दिल दहल जाता है। कई बच्चे बिना माता-पिता के अनाथ होकर पले, लेकिन पुराने सिस्टम ने उनकी सुध नहीं ली। हमारा प्रयास है कि अब किसी मां को ऐसी बेबसी न झेलनी पड़े।”

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न्याय का नया अध्याय: 200 से अधिक परिवारों को मिला सहारा
एलजी ने जानकारी दी कि इस वर्ष अब तक 200 से अधिक पीड़ित परिवारों को सरकारी नौकरियां दी जा चुकी हैं। शनिवार को कश्मीर डिवीजन के 39 परिवारों को नियुक्ति पत्र दिए गए, जबकि इससे पहले जम्मू में 41 और नौगाम ब्लास्ट के 9 पीड़ित परिवारों को राहत पहुंचाई गई है। उन्होंने कहा कि यह केवल कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि प्रशासन में खोए हुए भरोसे की वापसी है। अब पीड़ितों को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते, बल्कि सरकार खुद उनके दरवाजे तक पहुंच रही है।

पुराने सिस्टम और ‘आतंकी इकोसिस्टम’ पर कड़ा प्रहार
मनोज सिन्हा ने पुरानी सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि दशकों तक असली पीड़ितों को नजरअंदाज किया गया और आतंकी तत्वों के समर्थकों को प्राथमिकता मिली। उन्होंने संकल्प दोहराया कि जो कोई भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आतंकवाद का समर्थन करेगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन का लक्ष्य एक ऐसे जम्मू-कश्मीर का निर्माण करना है जहाँ न्याय सर्वोपरि हो और दहशतगर्दों के लिए कोई जगह न हो। इस समारोह ने साबित कर दिया है कि नया जम्मू-कश्मीर अब डर के साये से बाहर निकलकर सम्मान और स्वावलंबन की राह पर चल पड़ा है।

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