सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस पार्टी ने अपनी रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। पटना के ऐतिहासिक सदाकत आश्रम में 85 साल बाद हो रही कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की विस्तारित बैठक का मुख्य एजेंडा आगामी चुनाव ही है। इस बैठक में न केवल महागठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे पर मंथन होगा, बल्कि पार्टी की चुनावी रणनीति और अति पिछड़ा वर्ग पर विशेष ध्यान केंद्रित करने की योजना भी तैयार की जाएगी।
सीटों का बंटवारा: कांग्रेस का ‘प्रेशर पॉलिटिक्स’
CWC बैठक का एक सबसे बड़ा एजेंडा महागठबंधन के सहयोगी, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और अन्य दलों के साथ सीटों के बंटवारे पर चर्चा करना है। पिछली बार के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 70 सीटों पर लड़ी थी, लेकिन इस बार वह 60 से 66 सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बना रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पटना में CWC की बैठक आयोजित करने के पीछे कांग्रेस का मकसद अपनी ताकत दिखाना और महागठबंधन के अन्य दलों पर दबाव बनाना भी हो सकता है, ताकि उसे मनमाफिक सीटें मिल सकें।
अति पिछड़ा वर्ग को साधने की रणनीति
बैठक के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी अति पिछड़ा वर्ग सम्मेलन को संबोधित करेंगे, जो पार्टी की नई रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। कांग्रेस का मानना है कि अगर वे अति पिछड़ा वर्ग को महागठबंधन के साथ जोड़ने में सफल हो जाते हैं, तो बिहार में चुनावी बाजी पलटी जा सकती है। राहुल गांधी की हालिया ‘वोटर अधिकार यात्रा’ को मिली सफलता ने भी पार्टी को उत्साहित किया है। इस यात्रा में राहुल ने 1,300 किलोमीटर का सफर तय कर 174 विधानसभा क्षेत्रों तक अपनी पहुंच बनाई थी। राहुल का यह कदम यह दर्शाता है कि कांग्रेस बिहार चुनाव को लेकर कितनी गंभीर है।
मुख्य मुद्दे और चुनावी नारे
CWC बैठक में सीटों के बंटवारे के अलावा, पार्टी के लिए मुख्य चुनावी मुद्दे और नारे क्या होंगे, इस पर भी चर्चा होगी। कांग्रेस, खासकर बेरोजगारी, महंगाई, जातिगत जनगणना और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों को जोर-शोर से उठाना चाहती है। पार्टी इन मुद्दों के जरिए भाजपा और जदयू की ‘डबल इंजन’ सरकार को घेरने की कोशिश करेगी।
यह स्पष्ट है कि कांग्रेस अब बिहार में एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में उभरने की कोशिश कर रही है। वह न केवल सीटों के बंटवारे में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना चाहती है, बल्कि सामाजिक समीकरणों को साधकर अपने पुराने वोट बैंक को भी वापस लाना चाहती है। पटना की यह बैठक बिहार चुनाव के लिए कांग्रेस की दिशा और दशा तय करेगी।